शहर के हाई-प्रोफाइल ज्योति मर्डर केस में मनीषा मखीजा को जमानत मिलने के बाद शहरियों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या अब अन्य अभियुक्तों को भी जमानत मिल सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ता इस पर अलग-अलग दलील दे रहे हैं। कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि मनीषा को मोबाइल कॉल डिटेल आधार होने की बात का लाभ मिला है। पीयूष को भी इसी बात का लाभ मिल सकता है क्योंकि पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल में अभियुक्तों के संपर्क में रहने की बात कहते हुए ही पीयूष को अभियुक्त बनाया था। वहीं कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि ऐसा नहीं है। घटना में सभी अभियुक्तों का रोल अलग-अलग है। इसलिए इन अभियुक्तों को मनीषा मखीजा की जमानत का ग्राउंड मिलना मुश्किल होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी सिंह का कहना है कि मनीषा को जमानत देने में हाईकोर्ट ने कॉल डिटेल के अलावा अन्य कोई ठोस आधार न होने की बात कही है। इसी ग्राउंड का लाभ पीयूष को मिल सकता है। भले ही हत्या से पहले पीयूष के ज्योति के साथ वरांडा होटल में होने की सीसीटीवी फुटेज हों। वहां जाने की बात तो पीयूष ने खुद ही स्वीकार की थी। उसने कहा था कि लौटते समय बदमाशों ने ज्योति का अपहरण किया। इस तरह पीयूष के बारे में पुलिस की पहला सबूत मोबाइल कॉल डिटेल ही रहा है। दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बक्शी का कहना है कि सभी अभियुक्तों पर धाराएं भले ही एक जैसी लगी हों लेकिन घटना में सभी का रोल अलग-अलग है। मनीषा घटना में सीधे इनवॉल्व नहीं थी। उसे मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर अभियुक्त बनाया गया था। अन्य अभियुक्तों की स्थिति अलग है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामेंद्र सिंह का कहना है कि पीयूष को मनीषा की जमानत का लाभ नहीं मिलेगा। मर्डर से पहले ज्योति के साथ पीयूष की रेस्टोरेंट में उपस्थिति और फिर अन्य अभियुक्तों से बातचीत की कॉल डिटेल है। इसलिए पीयूष या अन्य अभियुक्तों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।