गाड़ी खींचने के मामले में एक फाइनेंस कंपनी के डॉयरेक्टर और दो कर्मचारियों को पकड़ने और फिर 85 हजार रुपये घूस लेकर छोड़ने के आरोप में एसएसपी शलभ माथुर ने बर्रा एसओ को लाइन हाजिर और एक कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है। मामले की जांच प्रशिक्षु आईपीएस को सौंपी गई है।
एसएसपी का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की जाएगी। इस मामले में अभी और पुलिसकर्मी घेरे में हैं। जांच के बाद उन पर भी कार्रवाई होगी। फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर ने इस मामले की शिकायत एसएसपी से लेकर डीजीपी तक की और सुबूत के तौर पर सीडी भी एसएसपी को दी।
श्रीराम फाइनेंस कंपनी के ऑटो फाइनेंस विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि दबौली निवासी सतवीर सिंह ने तीन साल पहले वैन खरीदने के लिए रुपये फाइनेंस कराए थे। करीब डेढ़ साल पहले सतवीर ने सफारी के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और फाइनेंस कराए। कुछ किस्तें देने के बाद कहीं और रहने लगे और किस्तें बंद कर दीं।
सतवीर पर दबाव बनाने के लिए कंपनी ने विवेक की वैन 6 मई को जब्त कर ली। दो दिन बाद विवेक बर्रा थाने पहुंचे और फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों पर साढ़े चार सौ रुपये लूटने और वैन छीनने का आरोप लगा तहरीर दे दी। एसओ रामबाबू शनिवार शाम चार बजे दलबल के साथ फाइनेंस कंपनी के गुमटी नंबर पांच स्थित दफ्तर पहुंचे।
आरोप है कि एसओ ने कर्मचारियों और डॉयरेक्टर गुरमीत सिंह, आटो लोन मैनेजर अनिल श्रीवास्तव और बृजेंद्र तिवारी से बदसलूकी की। इसके बाद डॉयरेक्टर और दो कर्मचारियों को थाने लाए और हवालात में डाल दिया।
रात करीब सवा आठ बजे 85 हजार रुपये घूस और विवेक की वैन मुक्त कराने के बाद एसओ ने डॉयरेक्टर और दोनों कर्मचारियों को छोड़ा। डायरेक्टर ने सपा नेताओं के साथ सोमवार को एसएसपी से लेकर डीजीपी तक वाकया बताया। कंपनी के लोगों ने घूस में दिए गए नोटों के नंबरों की भी वीडियोग्राफी कर ली थी।
आला अफसरों के निर्देश पर एसएसपी ने प्रारंभिक जांच के बाद एसओ रामबाबू को लाइन हाजिर कर दिया और कांस्टेबल मनोज को सस्पेंड कर दिया है। वहीं कांस्टेबल ने घूस की रकम कंपनी के लोगों को लौटा भी दी है।