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जच्चा-बच्चा में गर्भवती की मौत, हंगामा

Wed, 02 Sep 2015 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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मेडिकल कालेज से जुड़े जच्चा-बच्चा अस्पताल (अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज) में मंगलवार शाम गर्भवती की मौत हो गई। गुस्साए तीमारदारों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया और वार्ड ब्वाय अंतिम लाल को पीट दिया। सूचना पर पहुंची स्वरूप नगर पुलिस ने उचित कार्रवाई का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।
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इस बारे में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने कहा कि महिला को जब अस्पताल लाया गया था तब उसके शरीर में दो ग्राम हीमोग्लोिबन था। खराब स्थिति देखकर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया गया तो पेट में बच्चे के मृत होने की जानकारी मिली।

महिला को घर वालों ने उसे टिटनेस का इंजेक्शन भी नहीं लगवाया था। इलाज में लापरवाही का आरोप गलत है। नौबस्ता के धरी का पुरवा निवासी मनीष की पत्नी पायल (20) गर्भवती थी। सुबह उसे मुंह और नाक से खून आने पर जच्चा-बच्चा अस्पताल में डॉ. नीना गुप्ता की देखरेख में भर्ती कराया गया।
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मनीष ने बताया कि डॉक्टरों ने पायल का ठीक तरीके से इलाज नहीं किया। डॉक्टर पायल पर्चियां देकर बाजार से दवा मंगाती रहीं। शाम करीब 5:15 बजे पायल की मौत हो गई, पर इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। रात में कुछ लोग पायल का हालचाल लेने गए तो वह बेड पर मृत पड़ी थी। इससे नाराज लोगों ने  हंगामा किया।

अभिषेक और सागर नाम के युवकों ने वार्ड ब्वाय को पीट दिया। कर्मचारियों और महिला डॉक्टरों से बदसलूकी की गई। वार्ड ब्वाय के शोर मचाने पर सहकर्मी जुटे तब उसकी  जान बची।     

स्ट्रेचर नहीं मिला, तड़पीं महिलाएं
जिला महिला चिकित्सालय में मंगलवार दोपहर दर्द से बेहाल तीन महिलाएं पहुंचीं। उस समय इमरजेंसी में सिर्फ एक स्ट्रेचर था। एक महिला को स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया। ईदगाह कॉलोनी बेनाझाबर से प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को परिजन पैदल ही इमरजेंसी ले जाने को विवश दिखे।

एक और महिला स्ट्रेचर न मिलने के कारण जमीन पर लेट गई। एसआईसी डॉ. कंचनलता श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी नहीं है। इमरजेंसी में हो सकता है एक ही स्ट्रेचर उस वक्त रहा हो। वहां और स्ट्रेचर बढ़ाए रखे जाएंगे।

इलाज में लापरवाही की शिकार महिला की मौत
इलाज में लापरवाही की शिकार सामिया सोमवार देर रात जिंदगी की जंग हार गई। शहर के एक निजी अस्पताल में वह भर्ती थी। उसे करीब 50 यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका था। मंगलवार को तीन डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। वीडियोग्राफी भी हुई। माना गया कि संक्रमण के चलते सामिया की मौत हुई।

मामले में ग्वालटोली थाने में डॉक्टर समेत चार पर रिपोर्ट दर्ज है। पति शकील अहमद का कहना है कि 29 जुलाई को पत्नी सामिया को प्रसव पीड़ा हुई। जीवन ज्योति नर्सिंग होम में डॉक्टर नहीं थीं। आया डॉली ने कहा कि उनसे बात हो गई है। रुपये जमा कराने के बाद पत्नी को लेबर रूम में ले गई। वहां वार्ड ब्वाय रमाकांत और अन्य आया थी। प्

रसव तो हो गया लेकिन ज्यादा ब्लीडिंग देख आया ने तुरंत एंबुलेंस मंगाकर दूसरे अस्पताल में भेज दिया। तभी से सामिया आईसीयू में थी। चार लाख रुपये से ज्यादा खर्च के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

ग्वालटोली एसओ प्रभात कुमार सिंह का कहना है कि थाने में पहले ही जीवन ज्योति नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. जुगनू सिंह, आया डाली, वार्ड ब्वाय रमाकांत व एक अन्य आया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। पैनल रिपोर्ट के बारे में डॉक्टर से राय-मशविरा किया जाएगा।
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