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मखमल पे टाट का पैबंद, थानेदार ‘देवानंद’

Sun, 14 Dec 2014 03:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया।’ इस लीक पर चलते हुए अपराधियों के खिलाफ आईजी के मिशन को फेल करने में महकमे के एक थानेदार का नाम चर्चा में आ गया है।
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उनकी वजह से एसएससी, बैंक और पुलिस भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले गैंग का सरगना पुलिस के हाथ से फिसल गया। बर्रा में ही स्टेट बैंक डकैती कांड में भी पुलिस अफसरों की किरकिरी हुई।
सूत्रों के अनुसार आईजी के निर्देश पर एसएसपी जल्द ही थानेदार पर कार्रवाई करेंगे।
आईजी आशुतोष पांडे को पता चला था कि एसएससी, बैंक और पुलिस समेत अन्य विभागों में नौकरी दिलाने का ठेका लेने वाला एक गैंग शहर में सक्रिय है।
गैंग के लोग परीक्षाओं में अभ्यर्थी के स्थान पर सॉल्वर को बैठाते हैं। आईजी ने गैंग को पकड़ने के लिए अपने जोन कार्यालय के पुलिसकर्मियों की टीम के साथ क्राइम ब्रांच को टॉस्क सौंपा।
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आईजी की टीम ने पूरा मामला पकाया। इसके बाद अपनी रिपोर्ट आईजी को सौंप दी। आईजी ने बर्रा थानाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव को गैंग के बारे में जानकारी दी।
साथ ही उन्हें गैंग को दबोचने का जिम्मा सौंपा। थानेदार ने आईजी के आदेश को हल्के में लिया। उन्होंने जिम्मेदारी चौकी प्रभारी पर डाल दी। चौकी प्रभारी भी कम नहीं थे।
उन्होंने अपने सिर आई बला दो कांस्टेबलों के मत्थे मढ़ दी। कांस्टेबल उस मकान में पहुंचे जहां सॉल्वरों का पूरा गैंग टिका था।
 कांस्टेबलों ने बिना मामला समझे वहां जाकर कह दिया आईजी की तरफ से एक जांच आई है, चौकी प्रभारी से मिल लेना। बस इतना सुनते ही गैंग के कान खड़े हो गए, सब सरक लिए।
घाटमपुर के पतारा क्षेत्र के तेजूपुर गांव निवासी गैंग का सरगना अभिषेक सचान, उसकी एक उसकी कथित बहन, सहयोगी अमित सचान और खीरी जनपद के निर्मल नगर में रहने वाला आदित्य जाटव मौके से भाग निकले।
यह लोग तीन बोरे में भरकर फर्जीवाड़े से जुड़े कागजात भी अपने साथ ले गए। इस तरह बर्रा थानेदार की लापरवाही से साल्वरों का पूरा गैंग पुलिस के हाथ से फिसल गया। इससे आईजी का मिशन भी फेल हो गया।
थानेदार जयवीर सिंह की यह पहली हरकत नहीं है, जिससे पुलिस अफसरों की किरकिरी हुई। इससे पहले 16 अक्तूबर को बर्रा थाने की जनता नगर पुलिस चौकी से महज 100 मीटर दूर स्थित एसबीआई की शास्त्री चौक शाखा में बैंक डकैती हुई।
तीन बदमाश कैश काउंटर में रखे 70 हजार रुपये बम फोड़कर लूट ले गए। शाखा प्रबंधक मदन मोहन शाक्य ने तीन बदमाशों के खिलाफ तहरीर दी।
थानेदार के दो लोगों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया। इसके बाद बैंक के ही एक कर्मचारी जितेंद्र को हिरासत में लिया। एक हफ्ते से उससे पूछताछ की।
फिर गुपचुप तरीके से उसे 27 अक्तूबर को गिरफ्तार करके जेल में भेज दिया। जितेंद्र को लुटेरों का साथी बताया गया। दावा किया गया है कि बैंक के बाहर ताला बजाने वाला जितेंद्र ही था।
मजे की बात यह कि थानेदार ने जितेंद्र की गिरफ्तारी की सूचना एसएसपी तक को नहीं जरूरी नहीं समझा। इससे एसएसपी की किरकिरी हुई थी। अब आईजी का मिशन फेल करने से थानेदार फिर निशाने पर आ गए हैं।

सॉल्वर गैंग को दबोचने में बर्रा पुलिस कैसे फेल हुई है, इसका जिम्मेदार कौन है, जांच कराई जाएगी। दोषी थानेदार अथवा अन्य पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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के.सुनील इमैनुएल, एसएसपी
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