यूपी के जिला उन्नाव के नवाबगंज ब्लॉक में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) योजना में 23 लाख के घोटाले की जांच के बाद डीएम आदिति सिंह ने तत्कालीन दो ब्लॉक प्रमुखों और एक बीडीओ समेत आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। तत्कालीन एएमए से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है। सीडीओ संजीव सिंह ने बताया कि जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी की तहरीर पर अजगैन थाने में रिपोर्ट दर्ज होगी। दो वित्तीय वर्ष में योजना से हुए अन्य कार्यों की भी जांच कराई जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2010-11 और 2011-12 में नवाबगंज ब्लॉक के हड़ैया, जगदीशपुर सहित आठ गांवों में योजना के तहत नाली व इंटरलॉकिंग निर्माण के नाम पर 23 लाख 13 हजार 900 रुपये का भुगतान किया गया। 28 फरवरी 2017 को ब्लॉक के जहांगीराबाद निवासी गिरजा सिंह और शाहपुर गढ़ी के राजेश ने प्रशासन से निर्माण कार्य में लाखों के गड़बड़झाले की शिकायत की थी। डीएम ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम ने जांच के क्रम में अभिलेखों से मिलान किया तो मौके पर एक भी काम नहीं मिला।
जांच टीम ने 10 मार्च 2017 को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। रिपोर्ट में बिना काम के 23 लाख रुपये निकालने की पुष्टि होने पर डीएम ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी वीके सिंह को आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए। इनमें तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख मनोज कुमार, तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख माया देवी, तत्कालीन बीडीओ वीरेंद्र सिंह, कार्यप्रभारी एडीओ पंचायत अविनाश कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी परशुराम वर्मा, जेई लघु सिंचाई रघुनाथ सिंह शामिल हैं। तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। डीएम के निर्देश पर पांच कार्यदायी संस्थाओं को भी ब्लैक लिस्टेड किया गया।