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कमलेश तिवारी हत्याकांड: सिम व मोबाइल खरीदने के दौरान लिखाया रूरा के युवक का मोबाइल नंबर

Tue, 22 Oct 2019 06:44 PM IST
शिखा पांडेय क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कमलेश तिवारी हत्याकांड - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के हत्यारोपी शेख अशफाक हुसैन और पठान मुईनुद्दीन शातिर दिमाग हैं। दोनों ने उद्योग कर्मी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे यात्री प्रदीप कुमार यादव से पहले दोस्ती गांठी। इसके बाद ट्रेन में मोबाइल चोरी होने की कहानी प्रदीप को सुनाई। उसके मोबाइल के एक साथी को फोन किया।
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फिर रेलबाजार में टेलीकाम की दुकान से शेख अशफाक हुसैन ने अपनी आईडी पर मोबाइल व सिम खरीदा, लेकिन मोबाइल नंबर प्रदीप का लिखा लखनऊ चले गए। इसका खुलासा एसटीएफ की जांच में हुआ है।  हालांकि दो दिन की पूछताछ के बाद प्रदीप को एसटीएफ और लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने सोमवार को छोड़ दिया। देर शाम वह रूरा कानपुर देहात अपने घर पहुंच गया।
 
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रूरा गेंदामऊ गांव निवासी प्रदीप मुंबई में आरओ  वाटर प्यूरीफायर का धंधा करता है। उसकी मुंबई के दहिसर गांव में दुकान है। सूत्रों के मुताबिक प्रदीप ने एसटीएफ और पुलिस अफसरों को पूछताछ में बताया कि 17 अक्टूबर को वह उद्योग नगरी एक्सप्रेस से मुंबई से कानपुर आ रहा था।

उसके कोच में दो युवक भी यात्रा कर रहे थे। खुद को गुजरात का बताने वाले दोनों युवकों ने बातचीत के दौरान उससे दोस्ती कर ली। बातचीत में दोनों ने देवा शरीफ में चादर चढ़ाने की बात कही थी। इसके बाद शेख अशफाक ने ट्रेन में मोबाइल चोरी होने की बात कहकर उसके मोबाइल से किसी परिचित से बात की थी। सेंट्रल स्टेशन पर दोनों युवक उसी के साथ प्लेट फार्म नंबर एक पर उतरे थे।

उसी के साथ रेलबाजार के हैरिसगंज स्थित कान्हा टेलीकाम शाप से मोबाइल व सिम खरीदा था। सिम खरीदने के लिए अशफाक ने अपनी आईडी लगाई थी, लेकिन दुकानदार के रजिस्टर में उसका मोबाइल फोन लिखा दिया था। इसके बाद उसी से झकरकटी बस अड्डे का रास्ता पूछने के बाद दोनों लखनऊ जाने की बात कहकर चले गए थे।

एटीएफ को छानबीन में यह भी पता चला है कि शेख अशफाक हुसैन और पठान मुईनुद्दीन को हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही गुजराती भाषा का भी ज्ञान है। प्रदीप व मोबाइल शाप के मालिक से दोनों हिंदी, अंग्रेजी और आपस में गुजराती भाषा में बातचीत कर रहे थे। एसटीएफ और पुलिस ने कमलेश के हत्यारोपियों के कानपुर कनेक्शन को खंगाल रही है।
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इसके लिए पूर्व में प्रतिबंधित और आतंकी संगठनों से जुडे़ रहे लोगों के बारे में पता लगा रही है। 25 सालों में कानपुर और आसपास के जिलों में पकड़े गए आईएसआई व अन्य नक्सली और आतंकी संगठनों के लोगों की गतिविधियों को भी एसटीएफ और पुलिस देख रही है। इस बारे में कानपुर और आसपास के जिले को पुलिस कप्तानों को आईजी मोहित अग्रवाल भी निर्देश दिए हैं। 

बहाने से ले गई थी एसटीएफ   
रूरा के गेंदामऊ निवासी प्रदीप कुमार यादव की बहन सीता ने बताया कि शनिवार की रात भाई घर में था। देर रात कुछ लोग सादे कपड़ों में चार पहिया वाहनों से आए। प्रदीप के बारे में पूछा और कहा कि उसकी दुकान में चोरी हो गई है। जल्दी बुलाओ मुंबई लेकर जाना है। इसके बाद वे लोग गाड़ी में बिठाकर प्रदीप को मुंबई ले गए थे। सीता के मुताबिक 18 साल पहले प्रदीप के बड़े भाई अनिल व सुशील मुंबई गए थे। अब तीनों भाइयों ने मिलकर मुंबई में ही आरओ वाटर प्यूरीफायर का व्यापार करते हैं। सोमवार को प्रदीप के घर पहुंचने परिजनों ने राहत की सांस ली।
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