कानपुर साउथ। बर्रा में चौदह साल के मासूम हीरालाल को गोलियों से छलनी करने वाले कोई ऐसा सुराग नहीं छोड़ गए जिससे पुलिस उन तक पहुंच सके। हीरालाल गरीब का लाल था इसलिए पुलिस अपनी चाल चल रही है।
पुलिस बर्रा दो बाईपास और नजदीक स्थित टीटी पार्क के आसपास चक्कर काट रही है। अमर उजाला की टीम ने गुरुवार को हीरालाल के घर से लेकर बर्रा बाईपास तक क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन किया तो घटनास्थल के काफी नजदीक पहुंच गई। हालात बताते हैं कि हीरालाल को गोली कोचिंग मंडी के आसपास ही मारी गई है।
गोली खाकर 100 मीटर ही चल सकता
सचान गेस्ट हाउस शास्त्री चौक वाली रोड पर चलने पर लगभग एक किमी की दूरी पर दाएं हाथ संकट मोचन मंदिर है। इसके सामने वाली गली रामजानकी मंदिर रोड कहलाती है। इस रोड पर बाएं हाथ की चौथी गली में हीरालाल का घर है। हीरालाल के घर से निकले, बाईपास की ओर चले तो आगे 250 मीटर की दूरी पर राम जानकी मंदिर है। मंदिर से 100 मीटर आगे कोचिंग मंडी है।
कोचिंग मंडी के ठीक सामने से निकल कर हीरा बाईपास पर शौच के लिए जाता था। कोचिंग मंडी और बाईपास के बीच में उजाड़ टीटी पार्क है। घटना वाली रात हीरा बाईपास किनारे नित्य क्रिया करके लौट रहा था। चूूंकि गोलियां खाने के बाद वह रामजानकी मंदिर पर आकर गिरा तो एक बात उठती है कि चार गोलियां लगने के बाद कोई लड़का कितनी दूर तक जा सकेगा।
एक्सपर्ट कहते हैं कि गोलियां लगने से अगर महत्वपूर्ण अंग जैसे हार्ट, लिवर, किडनी या फेफड़े पंचर न हों तो कोई घायल अधिकतम 100 मीटर तक चल सकता है। अब मंदिर से 100 मीटर की दूरी पर कोचिंग मंडी ही है लिहाजा इतना तय है कि हीरा को गोली कोचिंग मंडी के आस-पास ही मारी गई।
जुआ, नशा और फायरिंग का अड्डा पार्क
बाईपास के निकट टंकी वाले टीटी पार्क से लगी हुई बैंक की जर्जर कालोनी अपराधियों की पनाहगाह बनी हुई है। पार्क में पूरे दिन अराजकत्वों की जुए की फड़ लगी रहती है।
मौके पर ताश की गड्डी, शराब की बोतल और नशीले इंजेक्शन के रैपर भी पाए गए। इलाकाई लोगों की माने तो बाईपास और पार्क के पास क्षेत्र के ही नहीं तात्याटोपे नगर, दबौली, गुजैनी, विश्व बैंक बर्रा और सफेद मस्जिद के आसपास के आपराधिक छवि वाले नए लड़कों का जमावड़ा लगा रहता है।
कोचिंग मंडी में मंडराते रहते शोहदे-मवाली
रामजानकी मंदिर के आसपास रहने वालों की मानें तो यहां चार-पांच कोचिंग सेंटर हैं। यहां इंटर तक फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ पढ़ाई जाती है। लड़कियां भी पढ़ती हैं। इसलिए आस-पास इलाकों के शोहदे मुंह पर रूमाल लगाकर दिन भर यहां बाइकों से फर्राटा भरते रहते हैं। रात 10 बजे तक लड़के घूमते रहते हैं।
मंगलवार रात करीब आठ बजे यह वारदात हुई। यह समय कोचिंग में आने-जाने वालों और शोहदों-मवालियों के समय से भी मैच खाता है। बड़ी बात नहीं कि घटना को अंजाम देने में कोचिंग आने वाले किसी सिरफिरे रईसजादे का हाथ रहा हो।
खून से सनी शर्ट, पुलिस को नहीं मिली एक बूंद
हीरा के पिता पीलेराम की शर्ट खून से लाल है, लेकिन पुलिस को मौके से लेकर मंदिर तक कहीं भी खून की एक बूंद भी नहीं मिली, जिससे घटनास्थल का पता चल सके। पुलिस की यह बात हजम नहीं होती।
बोले कातिल, मार कर हटाओ इसे
खून से लथपथ बेटे को गोद में लेकर जब पिता उसे अस्पताल ले जा रहा था, तो उसने धीरे से कान में कहा था कि पापा चेन चढ़ाते वक्त कोई बोला कि मार कर हटाओ इसे रास्ते से। पिता पीलेराम की इस बात से साफ है कि हमलावर एक नहीं, दो थे।
इलाज में देरी भी बनी मौत की वजह
इलाकाई लोगों की मानें तो हीरालाल को समय पर इलाज नहीं मिला। पहले तो वह करीब बीस मिनट तक मंदिर में ही पड़ा रहा, फिर लगभग बीस मिनट ही आसपास के दो अस्पतालों में जाने पर बीत गए। इसके बाद उसे हैलट ले जाया गया।