बैंकों में टप्पेबाजी करने वालों ने एसबीआई की ग्रीन चैनल सुविधा को ठगी का साधन बनाना शुरू कर दिया है। यदि आपके पास एसबीआई का डेबिट कार्ड है तो संभालकर रखिएगा। वो गलत हाथों में पड़ गया तो आपको लाखों का चूना लग सकता है।
आरपीएफ से रिटायर्ड रजोल द्विवेदी का सेविंग अकाउंट एसबीआई की सरसौल शाखा में है। रिटायरमेंट पर मिली एक बड़ी राशि रजोल के अकाउंट में थी। 4 नवंबर 2015 को वह सरसौल के एक एटीएम से रकम निकालने पहुंचे तो वहां पहले से एक युवक मौजूद था।
मदद के बहाने वृद्ध को झांसे में लेकर युवक ने एटीएम का पिन पूछा और कार्ड को बदल दिया। ठग ने 4 नवंबर को ही एसबीआई की कृष्णानगर शाखा से 40 हजार, डीएमएसआरडी से 20 हजार और 5 नवंबर को एसबीआई की केशवपुरम, पांडुनगर, लाजपत नगर, रामकृष्णनगर, 80 फीट रोड, नवीन मार्केट शाखाओं से 40-40 हजार रुपये निकाल लिए गए। ग्वालटोली शाखा से 50 हजार रुपये निकाले गए।
दो दिन के अंदर कुल 4 लाख 70 रुपये की ठगी कर ली गई। बाकी रुपये एटीएम से निकाले गए। रजोल ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। जब इन शाखाओं का सीसीटीवी फुटेज खंगाला गया तो पचा चला कि ठग ने यह सारी रकम ग्रीन चैनल के माध्यम से निकाली थी।
ये है ग्रीन चैनल
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को ‘ग्रीन चैनल’ की सुविधा दे रखी है। बैंक के एक काउंटर में बैठा क्लर्क आपका कार्ड स्वैप कर पिन कोड डालने को देगा। ग्राहक इस सुविधा के तहत एसबीआई की एक ब्रांच से एक बार में अधिकतम 40 हजार रुपये निकाल सकता है। 40-40 हजार कर आप दिन में पूरी रकम भी निकाल सकते हैं। इसी सुविधा का इस्तेमाल ठग ने किया। न कोई दस्तखत, न ही कोई पहचान पत्र।