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ससुरालियों को फंसाने के लिए पिता को मारा

Sun, 17 Jul 2016 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार बेटे अवधेश और गजराज। - फोटो : amarujala
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 दहेज हत्या में फंसे भाइयों ने ससुरालियों को फंसाने के लिए अपने बुजुर्ग पिता का कत्ल कर दिया और ससुरालियों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जांच-पड़ताल में बेटों की भूमिका संदिग्ध लगने पर पुलिस ने सख्ती की तो असलियत सामने आ गई।
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पुलिस ने दोनों हत्यारोपी बेटों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया। दो बेटे पहले से ही दहेज हत्या में जेल में बंद हैं।


एसएसपी शलभ माथुर ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि सचेंडी के ग्राम कटरा भैसोर में 11 जुलाई को घर के भीतर बुजुर्ग राजकुमार (70) की गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई थी। राजकुमार के बेटे अवधेश ने मौके पर जांच करने पहुंची पुलिस से बताया था कि बड़े भाई इंद्रकुमार की पत्नी शशी की आठ माह पहले जहर खाने से मौत हो गई थी।

शशी के भाई नेकचंद्र ने बहन की मौत का बदला लेने के लिए अपने तीन साथियों के साथ मिलकर पिता को गर्दन रेतकर मार डाला। पुलिस ने जब पड़ताल की तो पता चला कि नेकचंद्र ने ही राजकुमार और उसके चार बेटों अवधेश, गजराज, इंद्रकुमार और सर्वेश पर दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसका कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।
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जांच पड़ताल में अवधेश की भूमिका संदिग्ध मिलने पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया। उसने बताया कि दहेज हत्या से बचने और ससुरालियों को फंसाने के लिए पिता की हत्या की है। अवधेश ने छोटे भाई गजराज के साथ हत्या की प्लानिंग की थी, इसलिए पुलिस ने अवधेश पर हत्या और गजराज पर हत्या की साजिश में शामिल होने की कार्रवाई की है।

कोर्ट की तारीख वाले दिन हत्या
11 जुलाई को दहेज हत्या के मामले की कोर्ट में तारीख थी। राजकुमार ने अपने बेटे अवधेश और गजराज से कहा कि रोज-रोज की तारीख और झंझटों से ऊब गए हैं। समझौते के लिए बहू के मायके वाले 12 लाख मांग रहे हैं। खेत बेचकर 12 लाख देकर समझौता कर लेंगे तो जेल में बंद दोनों बेटे भी बाहर आ जाएंगे।

इस पर अवधेश और गजराज राजी नहीं हुए और पिता की हत्या का प्लान बनाया। पूछताछ के दौरान अवधेश ने बताया कि पिता की हत्या इसलिए कर दी कि जब दूसरा पक्ष भी हत्या में फंस जाएगा तो खुद समझौता करेगा और खेत भी बिकने से बच जाएंगे। 

फंसाने में फंस गया अवधेश
पुलिस सूत्रों की माने तो यदि अवधेश नेकचंद्र को नामजद न करता तो शायद फंसता भी नहीं, क्योकि अवधेश के मुताबिक उसने नेकचंद्र व उसके साथियों को अपने घर के पास देखा था। जब पुलिस ने नेकचंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसकी लोकेशन कहीं और निकली,

बस यहीं से पुलिस को अवधेश की कहानी पर शक हुआ और उसे हिरासत में लेते ही उसने पूरी सच्चाई खुद ही उगल दी।

इतने तो बेरहम न बनो बेटा
अवधेश से जब पूछा गया कि उसके हाथ में चाकू देख राजकुमार ने विरोध नहीं किया तो उसने रोते  हुए बताया कि पिता के आखिरी शब्द उसने यही सुने थे कि बेटा इतने बेरहम तो न बनो, लेकिन उस वक्त उसके सिर पर खून सवार था और उसने पिता की गर्दन रेत दी।
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