मृत घोषित हो चुकी विवाहिता ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में पहुंचकर खुद के जीवित होने का प्रार्थना पत्र दिया
चित्रकूट में मर चुकी विवाहिता के जिंदा होने का अनोखा मामला सामने आया है। बुधवार को मृत घोषित हो चुकी विवाहिता ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में पहुंचकर खुद के जीवित होने का प्रार्थना पत्र दिया। बाद में कोर्ट ने महिला का बयान दर्ज कर जेल में बंद पति और चचिया सास को छोड़ने का आदेश दिया। इसके अलावा विवेचना कर रहे पुलिस अफसर को मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राजापुर थाना अंतर्गत बेराउर गांव की ज्ञानमति पुत्री मिलनवा की शादी मऊ थाना अंतर्गत टिकरा गांव में जुलाई 2015 में हुआ था। पांच अक्तूबर 2016 को ससुराल से अचानक उसके गायब हो जाने पर विवाहिता के पिता ने राजापुर थाने में दहेज के मामले में लड़की को गायब कर देने का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने 498ए, 323, 504, 506 धाराओं में मामला दर्ज किया था। इसके एक सप्ताह बाद कौशांबी जिले में एक महिला का शव बरामद होने पर विवाहिता के पिता ने पहचान कर बताया कि यह शव उसकी लड़की का है। इसके बाद राजापुर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ाकर मामले में विवाहिता के पति उदित नारायण उर्फ मंझा व उसकेे चचिया सास सुमित्रा को जेल भेज दिया। दोनो बांदा जेल में बंद हैं।
इस मामले मेें बुधवार को नया मोड़ आया। जिसमें मूत घोषित महिला ज्ञानमति ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुभाष सिंह की अदालत में जीवित होने का प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुभाष सिह ने मामले में ज्ञानमती पुत्री मिलनवा के 164 के तहत बयान दर्ज कर पुलिस को आदेश दिया है कि गैर इरादतन हत्या के मामले में (धारा 304) अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए मानवीय आधार पर पति और चचिया सास को जेल से रिहाई कार्रवाई की जाए। वहीं महिला ने बताया कि वह रिश्तेदारी में चली गई थी।
उधर, ज्ञान मति के मामले में विवेचना कर रहे राजापुर क्षेत्राधिकारी ब्रजराज ने बताया कि महिला ने बताया कि पति और ससुरालीजन से किसी बात पर नाराज होकर रिश्तेदारी में चली गई थी। ससुरालीजन दहेज की मांग नहीं करते थे।