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ये सरकारी ‘साहब’ तो 100 करोड़ के मालिक निकले

Sat, 22 Apr 2017 03:45 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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भ्रष्ट वाणिज्यकर अधिकारी
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एक लाख 41 हजार रुपये महीने की सैलरी वाले वाणिज्यकर के एडिशनल कमिश्नर केशव लाल अकूत दौलत के मालिक निकले। उनके पास अब तक सौ करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आ चुकी है। आयकर विभाग की शुक्रवार को हुई जांच में पांच और अचल संपत्तियों का पता चला। फ्लैटों और प्लाटों की संख्या अब 12 हो चुकी है। इनकी अनुमानित कीमत 70 से 80 करोड़ मानी जा रही है। 
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कानपुर से रवाना हुई आयकर अफसरों की टीम केशव लाल को लेकर सुबह चार बजे नोएडा पहुंची। आठ बजे आयकर निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की। काफी देर तक ना-नुकुर के बाद अपने ही जवाब में फंसने पर उन्होंने कुछ अहम जानकारियां आयकर अफसरों को दीं। इसी पूछताछ में कुछ और संपत्तियों का पता चला। एडिशनल कमिश्नर ने वाणिज्यकर अफसरों की कमाई का फंडा भी बताया।

आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि हैं कानपुर जोनल कार्यालय के चार और जूनियर अफसरों (असिस्टेंट कमिश्नर से ज्वाइंट कमिश्नर तक) का कच्चा चिट्ठा खोला जा सकता है। उन्हें पूछताछ के लिए सम्मन भेजा गया है। आयकर निदेशालय (जांच) के ज्वाइंट डायरेक्टर अमरेश कुमार तिवारी के निर्देश पर डिप्टी डायरेक्टर वेदप्रकाश, डिप्टी कमिश्नर गणेश सक्सेना आदि अफसरों की बीते तीन दिनों से इनके ठिकाने पर जांच रही है। 
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अब तक बरामदगी 
11 करोड़ रुपये कैश 
12 किलो सोना 
12 फ्लैट 
5 लॉकर 

डीके वर्मा और सुनीता पर भी गिरेगी गाज
काली कमाई से धनकुबेर बने वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर केशव लाल पर आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गाज गिर ही गई। सीएम के निर्देश पर शासन ने शुक्रवार को केशवलाल को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई केशव के घर से करोड़ों की नकदी और कई किलो सोना की बरामदी के बाद की गई है। कानपुर की एआरटीओ सुनीता वर्मा के पति व वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर डीके वर्मा पर भी गाज गिर सकती है। आयकर विभाग वर्मा के घर से भी अब तक करीब 84 लाख नगद बरामद कर चुका है। हालांकि यह कार्रवाई वर्मा की एआरटीओ पत्नी के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर की गई थी। लेकिन अब आयकर विभाग यह पता करने में लगा है कि बरामद धनराशि सुनीता की है या डीके वर्मा की। उधर वाणिज्य कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने भी आयकर विभाग से जांच रिपोर्ट से अवगत कराने को कहा है। इसलिए माना जा रहा है कि अगर आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट में डीके का नाम आया तो उनके खिलाफ भी शासन कार्रवाई कर सकता है।
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