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नहीं मिला आशुतोष, पुलिस पस्त

Sat, 11 Jun 2016 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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किदवई नगर वाई ब्लॉक में इसी सड़क से आशुतोष अपनी बहन तान्या के साथ गया था कोचिंग। - फोटो : amarujala
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कानपुर साउथ। नौबस्ता से बैंक मैनेजर के 11वर्षीय बेटे आशुतोष को अगवा कर फिरौती मांगने वालों ने कोई भी ऐसा सुराग नहीं छोड़ा, जिससे पुलिस उन तक पहुंच सके। अपहर्ता  बार-बार लोकेशन बदल रहे हैं और पुलिस पीछा करते-करते पस्त हो चुकी है। अपहरण के 48 घंटे से भी ज्यादा का वक्त बीत जाने के बाद भी पुलिस खाली हाथ है। पुलिस की अब तक की सारी रणनीति फेल हो चुकी है। पुलिस की 15 से ज्यादा टीमें कई शहरों में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को उठाया है। ‘अमर उजाला’ टीम ने शुक्रवार को आशुतोष के घर से लेकर ट्यूशन टीचर के घर तक क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन किया तो सुराग मिला कि आशुतोष का अपहरण त्रयबंकेश्वर मंदिर के पास से हुआ। 
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शातिराना अंदाज दे रहा पुलिस को मात 
अपहर्ताओं का तरीका किसी पेशेवर अपराधी से कम नहीं है। यही वजह है कि पुलिस 
लगातार मात खा रही है। अपहरणकर्ता पिता से फोन पर चंद सेंकेड ही बात कर रहा है ताकि पुलिस लोकेशन आसानी से ट्रेस न सके। बात करने के बाद बाद फोन को स्विच ऑफ कर दे रहा है। अब तक आए फोन में हर बार अलग-अलग लोकेशन मिली है।
भाषा मुंबइया
पुलिस की मानें तो अपहर्ता का बोलने का अंदाज मुंबइया है। फिरौती मांगने और बोलने के दौरान जिन अल्फाजों को अपहर्ता इस्तेमाल कर रहा है, वह मुंबइया हैं लेकिन पुलिस यह भी मान रही है कि अपहर्ता बनवाटी भाषा का भी प्रयोग कर सकता है ताकि पुलिस भाषा को लेकर गुमराह हो सके।
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चप्पे-चप्पे से वाकिफ था अपहर्ता 
अपहर्ता क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। उसे सुभाष पब्लिक स्कूल और अनिल जैन के मकान में लगे कैमरों की भी जानकारी थी। इसलिए उसने मंदिर के पास पहुंचते ही आशुतोष को अगवा किया, ताकि वह कैमरे में कैद न हो सके। साथ ही उसने भागने में भी उसी रास्ते का प्रयोग किया, जिस पर न तो कोई कैमरा नहीं था और न ही वहां ज्यादा आवाजाही रहती है।    
क्यों नहीं पड़ी किसी की नजर
आशुतोष को जहां से अगवा किए जाने का अनुमान पुलिस लगा रही है, उसके पास ही निर्माणाधीन मकान में मजूदर काम कर रहे थे, लेकिन मजदूरों ने किसी को भी बच्चे को ले जाते नहीं देखा। न तो कोई शोर शराबा सुना। इससे साफ है कि आशुतोष को ले जाने वालों में कोई परिचित है, जिनके साथ वह आसानी से चला गया।
 दूसरी गली से गया था आशुतोष
बुधवार शाम करीब 4:20 बजे ट्यूशन टीचर के घर से पेंसिल लेने जाने की बात कहकर निकला आशुतोष अगवा कर लिया गया था। आशुतोष को ट्यूशन टीचर के घर तक उसकी बहनें छोड़ने और लेने जाती थीं। उनके आने और जाने का रास्ता मंदिर वाली सूनसान गली से था, लेकिन घटना वाले दिन आशुतोष को टीचर के घर छोड़ने गई बहन तान्या मंदिर वाली गली के बजाय उससे पहले वाली गली से उसे ट्यूशन टीचर के घर लेकर पहुंची। इसके बाद उसी सन्नाटे वाले रास्ते वह घर लौटी। इसकी पुष्टि गली में रहने वाले अनिल जैन के मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे से हुई है। ट्यूशन टीचर के घर से अनिल जैन के घर तक 500 मीटर की दूरी तय करने में तान्या को 35 मिनट लगे। 
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