छात्र धीरू की मौत की खबर गांव आते ही मातम छा गया। दुर्घटना में विधवा मां का इकलौता चिराग बुझ गया। इकलौते बेटे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
महोबा के खन्ना थानाक्षेत्र के ग्राम बरबई निवासी धीरू के पिता वासुदेव की 10 साल पहले मौत हो चुकी है। मृतक वासुदेव की पत्नी शिवदेवी किसी तरह बच्चे की परवरिश कर रही थी। एक साल की उम्र में पिता का बेटे के सिर से साया उठ जाने के बाद 11 साल तक बेटे को पाल पोश कर बड़ा किया। मां को क्या पता था कि उसके बुढ़ापे की लाठी बीच में ही टूट जाएगी।
स्थिति यह है कि अब विधवा शिवदेवी के घर में कोई चिराग जलाने वाला तक नहीं बचा है। मां इकलौते बेटे की मौत के बाद से बदहवास हालत में है। गांव की तमाम महिलाएं पहुंचकर सांत्वना दे रही हैं। लेकिन शिवदेवी रोते-रोते बेहोश हो जाती है।