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इंस्पेक्टर का भी फोन चौकी इंचार्ज ने नहीं उठाया

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जाफरगंज।
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कारागार राज्यमंत्री के पैतृक गांव में हत्या की सूचना के बाद भी पुलिस बेफिक्र बनी रही। ओहदेदार मंत्री के इलाके में हत्या के बाद पूरी रात पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। चौकी इंचार्ज के मोबाइल पर घंटी बजती रही उन्हें उठाने की फुर्सत नहीं मिली। खास बात तो यह है कि चौकी इंचार्ज ने अपने थानेदार का सीयूजी नंबर भी उठाना मुनासिब नहीं समझा।

जाफरगंज के जद्दूपुर गांव के बाबूलाल की रविवार की रात गोली मारकर हत्या की गई। प्रदेश के राज्य कारागार मंत्री जय कुमार उर्फ जैकी का यह पैतृक गांव है। इस वारदात के बाद बाबूलाल के बेटे अमित ने बताया कि उसने सात बार चौकी इंचार्ज को कॉल किया।
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उन्होंने मोबाइल नंबर नहीं रिसीव किया तो 100 नंबर पर सूचना दी। हालांकि 100 नंबर आधे घंटे बाद पहुंच गई। इसी दौरान बिंदकी से 108 नंबर एंबुलेंस भी आ गई, लेकिन चौकी इंचार्ज नहीं आए। एसएचओ अरविंद सिंह गौतम को खबर मिली तो वह भोर पहर मौके पर पहुंच गए। पीड़ित अमित को एफआईआर के लिए जिला अस्पताल से थाने लेकर पहुंचे। उन्होंने थाने से रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद चौकी इंचार्ज के मोबाइल पर कई बार सीयूजी से क ॉल किया।

इसके बाद भी चौकी इंचार्ज का मोबाइल नहीं उठा। अमित की तहरीर में चौकी इंचार्ज के मोबाइल न उठाने का जिक्र भी है। बेटे अमित का आरोप है कि चाचा राधेलाल का चौकी इंचार्ज के पास आना जाना रहा है। राधेलाल गांव आते तो चौकी इंचार्ज के पास जरूर जाते थे।
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चौकी इंचार्ज की मिलीभगत से ही घटना को अंजाम दिया गया है। बाबूलाल की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी कुसुमा देवी व बेटी सारिका रो-रो कर बेहाल रही। उनके दो बेटे अमित और ललित हैं। सबसे बड़ी बेटी शशि की शादी हो चुकी है। ललित बिहार में प्राइवेट नौकरी करता है।

बाबूलाल पांच भाई मोतीलाल, विजय, राज बहादुर और राधेलाल हैं। इनमें विजय और राजबहादुर की पिछले तीन साल में मौत हो चुकी है।

-30 किलोमीटर दूरी से पहुंची एंबुलेंस, नहीं पहुंचे चौकी इंचार्ज
-चौकी इंचार्ज का फोन बजता रहा, पीड़ित ने तहरीर में किया इसका जिक्र
अमर उजाला ब्यूरो
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