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विधानसभा अध्यक्ष ने निराला की प्रपौत्रवधू की सुध ली

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विधानसभा अध्यक्ष ने ली निराला के परिवार की सुध
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क्रासर-
जिला अस्पताल में भर्ती निराला की प्रपौत्र वधू रेखा के इलाज के लिए दो लाख देने की घोषणा
घर की मरम्मत के लिए सीएम से दिलाएंगे तीन लाख, महाकवि के गांव का भी होगा सुंदरीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
पुरवा (उन्नाव)। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ की जयंती पर सोमवार को उनके गांव गढ़ाकोला पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने उनके परिवार की भी सुध ली। जिला अस्पताल में भर्ती निराला की प्रपौत्र वधू रेखा के इलाज के लिए दो लाख रुपये दिलाने के साथ ही उनके गांव-घर के सुंदरीकरण का वादा भी किया।
गढ़ाकोला निवासी निराला के प्रपौत्र राजकुमार बीघापुर स्थित निराला महाविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। कुछ दिन पहले उनके कच्चे घर की दीवार ढह गई थी। इससे राजकुमार की पत्नी रेखा देवी घायल हो गईं थीं। जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। सोमवार को निराला जयंती पर विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित गढ़ाकोला गांव में आयोजित समारोह में पहुंचे। यहां गांववालों ने रेखा के घायल होने के बारे में जानकारी दी तो विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से रेखा के इलाज के लिए दो लाख रुपये दिलाने की घोषणा की।
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साथ ही निराला के जर्जर घर की मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री से तीन लाख रुपये दिलाने की भी बात कही। विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि गांव में निराला उद्यान स्मारक, पुस्तकालय सहित पूरे गांव का सुंदरीकरण कराया जाएगा। गांव तक आने वाली सड़क नए सिरे से बनवाई जाएगी। दूसरी ओर जिला अस्पताल में भर्ती रेखा को देखने के लिए कोई बड़ी हस्ती नहीं पहुंचा। जिलाधिकारी रवि कुमार एनजी ने सिर्फ फोन से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
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इंसेट-
कौन थे निराला
महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पिता रामसहाय तिवारी उन्नाव जिले के गढ़ाकोला गांव के निवासी थे। वह पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर के महिषादल रियासत में सिपाही थे। मेदनीपुर में ही निराला का जन्म हुआ। कुछ जगह उनकी जयंती 11 फरवरी 1896 तो कुछ जगह 21 फरवरी 1899 लिखी है। जयंती की तिथि पर साहित्यकारों में विवाद की स्थिति बनने पर 1930 से वसंत पंचमी के दिन निराला जी की जयंती मनाई जाने लगी। निराला ने कई पत्र पत्रिकाओं का संपादन किया। अगस्त 1923 से मतवाला के संपादक मंडल में कार्य किया। 1942 से मृत्यु पर्यंत इलाहाबाद में रहकर स्वतंत्र लेखन किया। उनकी प्रमुख कविता संग्रह में अनामिका (1923), परिमल (1930), गीतिका (1936) आदि हैं। कहानी संग्रह चतुरी चमार, सुकुल की बीवी खासतौर से चर्चित रहीं।
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