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सीबीआई का पट्टाधारकों के आवासों पर छापा

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फतेहपुर। वर्ष 2013 में जिलाधिकारी अभय सिंह के कार्यकाल में जिन लोगों को खनन के पट्टे आवंटित किए गए, उनके घरों पर बुधवार की सुबह ही सीबीआई की टीम ने छापा मारा। टीम ने इन सभी के यहां से तमाम कागजात जब्त किए और अपने साथ ले गई है।
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2013 में करीब नौ माह फतेहपुर में डीएम रहे अभय सिंह ने चार लोगों को खनन के पांच पट्टे आवंटित किए थे। पट्टा आवंटन में नियमों के उल्लंघन को लेकर सीबीआई की टीम ने बुधवार को बुलंदशहर में डीएम अभय सिंह के आवास और फतेहपुर में पट्टेधारकों के आवासों पर छापा मारा। सीबीआई टीम ने बुधवार की सुबह असोथर और शहर के हरिहरगंज और आवास-विकास कालोनी में पट्टाधारकों के आवासों पर छापा मारा। छापे में टीम पट्टाधारकों के घरों से उस समय के ट्रेजरी के कागजात, रवन्नों की प्रति और चालान के कागज अपने साथ ले गई है। सीबीआई की शहर में मौजूदगी से पूरे जिले में सनसनी मची रही। मौरंग के कारोबार से जुड़े कई लोगों ने अपने फोन बंद कर लिए तो कई सीबीआई टीम की लोकेशन पता करने में लगे रहे।
फतेहपुर। जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद के असोथर घर में सीबीआई की टीम बुधवार सुबह पहुंची। उन्होंने बताया कि 2006 में उन्हें खनन के दो पट्टे मिले थे। गुरुवल तीन नंबर व कोर्राकनक दो नंबर। तीन साल तक चलाया। इसके बाद एक साल बंद रखा। अप्रैल 2014 में डीएम अभय के समय नवीनीकृत हुआ। इसके बाद 2016 में अप्रैल माह में स्टे हो जाने से फिर बंद हो गया। सुखराज निषाद ने बताया कि सीबीआई टीम इससे पहले उनसे फतेहपुर व लखनऊ में पूछताछ कर चुकी है। बुधवार को आई टीम उनसे एनओसी, डीड, रजिस्ट्री आदि कागजात ले गई। टीम ने कागजात के चक्कर में उनके घर में छानबीन की। हालांकि ज्यादा देर रुके बिना निकल गई। टीम का वह बराबर सहयोग कर रहे हैं।
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2013 में करीब नौ माह फतेहपुर में रहे बुलंदशहर के जिलाधिकारी अभय सिंह के खिलाफ कार्रवाई जरूर बुधवार को की, लेकिन इसकी पटकथा 27 जून को ही लिख दी गई थी। सीबीआई की दिल्ली शाखा की एक टुकड़ी ने एक सप्ताह पहले जनपद में डेरा डाला था। टीम ने रात को खनन कार्यालय का ताला खुलवाकर पांच साल पहले के दस्तावेज खंगाले थे। वह पट्टों की मूल पत्रावलियां भी साथ ले गई थी।
सीबीआई दिल्ली शाखा की तीन सदस्यीय टीम 27 जून को शहर में आई थी। टीम में सीबीआई के एक सीओ, इंस्पेक्टर और सिपाही शामिल थे। टीम की यह कार्रवाई बेहद गोपनीय थी। जांच अधिकारियों ने जीटी रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में डेरा डाला था। टीम ने तत्कालीन जिला खनन अधिकारी सौरभ गुप्ता और अपर जिलाधिकारी पप्पू गुप्ता से 2012 और 2013 में हुए खनन के पट्टों के संबंध में जानकारी जुटाई थी। तत्कालीन डीएम अभय सिंह के 2013 के कार्यकाल में आवंटित किए गए खनन पट्टों की मूल पत्रावलियां अपने साथ ले गई थी। इसकी पुष्टि करते हुए अपर जिलाधिकारी पप्पू गुप्ता ने बताया कि सीबीआई की टीम अपने साथ सारे अभिलेखों की मूल पत्रावलियां ले गई थी। इस वजह से खनन कार्यालय में 2012 और 2013 के कार्यकाल की एक भी मूल फाइल उपलब्ध नहीं है।
नियमों को किनारे कर दिए गए थे खनन पट्टे
ई-टेंडरिंग के बगैर पांच खनन पट्टे हुए थे नवीनीकृत
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। प्रदेश में खनन नीति बदलने के बावजूद खनन माफिया का दखल प्रशासन में अकड़ के साथ दिखा। यही वजह रही कि नियमों को दरकिनार कर जिले में भी खनन के पांच पट्टे नवीनीकृत कर दिए गए। शासन के पट्टा नवीनीकरण पर रोक और ई-टेंडर से आवंटन का बना नियम धरा का धरा रह गया था। सपा शासनकाल में हुए इन्हीं मामलों की जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई कर रही है।
जिले में जिलाधिकारी के रूप में अभय सिंह का कार्यकाल 30 सितंबर 2013 से आठ जून 2014 तक रहा। हालांकि उनकी तैनाती से पहले ही प्रदेश शासन ने 31 मई 2012 के बाद किसी भी पट्टेधारक का आवंटन नवीनीकृत न करने और अगली निविदा ई-टेंडर के जरिए करने का आदेश दिया था। जिले में इसका पालन नहीं किया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसके पीछे जिला प्रशासन व विभाग का तर्क यह रहा कि शासन का आदेश भले ही 2012 में हुआ लेकिन यहां यह आदेश 2014 में पहुंचा। तब तक पुराने नियम के ही आधार पर पट्टे नवीनीकरण के कार्य हो चुके थे।
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इनसेट
इन्हें दिए गए पट्टे
जिले में सुखराज निषाद को गुरुवल तीन नंबर और कोर्राकनक दो नंबर का पट्टा किया गया। शिव सिंह फर्म को कोर्राकनक पांच नंबर, शिव चरन सिंह को ओती तीन नंबर तथा अनिल कुमार गुप्ता को ओती चार नंबर आवंटित किया गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बीते 27 जून को सीबीआई की टीम इन्हीं पट्टों की मूल पत्रावलियां अपने साथ ले गई थी।
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साइड स्टोरी
एक विधायक और महिला सपा नेत्री का चलता था सिक्का
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। खनन के कारोबार में हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और वाली स्थिति थी। सपा शासन काल में खनन के पट्टे भले ही साधारण लोगों के नाम थे, लेकिन उनमें सिक्का सत्ताधारियों का ही चलता था। पट्टाधारक सुखराज निषाद, शिव सिंह और अनिल कुमार के खनन का संचालन सत्ता की हनक के बिना संभव नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से मौरंग का धुआंधार डंप लगाने, ओवरलोड मौरंग लादकर सप्लाई करने और बिना रवन्ने के वाहनों को थानों और तहसीलों के सामने से पास कराने के लिए कुछ सत्ताधारी और जनपद के कुछ कद्दावर इन खदानों के अप्रत्यक्ष साझेदार बने। बांदा जिले के एक विधायक और फतेहपुर की एक महिला सपा नेत्री का खूब दबदबा था। यह दबदबा इस कदर था कि जिला प्रशासन ने आंखों पर पट्टी बांधकर हर तरह के काम को अपना मौन समर्थन दे रखा था। कोर्राकनक, ओती और गुरुवल खनन का आवंटन तो लिखापढ़ी में हुआ था। हनक वालों की टोली इसके इतर अढ़ावल, लम्हेटा और मडइयन में भी ताबड़तोड़ खनन करा रही थी। खनन के इस कारोबार से प्रतिदिन लाखों रुपयों की आमदनी होती थी। जिसका बराबरी से बंटवारा होता था। पट्टेधारकों की भूमिका की बात करें तो वो सिर्फ मामूली प्यादे थे। पूरे खेल के खिलाड़ी सफेदपोश थे। कॉकस इतना मजबूत था कि किसी की हाथ डालने की हिम्मत नहीं पड़ी।
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जिले की मौरंग में सिंडिकेट का 40 फीसदी हिस्सा था
शेष साठ प्रतिशत में थे पट्टेधारक और अन्य थे
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में मौरंग घाट के संचालन को पंचम तल से संरक्षण दिलाने के नाम पर तीन सिंडीकेटों ने इंट्री मारी थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो इनमें से एक ही सिंडिकेट को ही सफलता मिली। चर्चा है कि खुद को सत्ता का नजदीकी बताने वाला सिंडिकेट पूरे जिले के मौरंग व्यापार से चालीस फीसदी हिस्सा अकेले लेता था। शेष साठ प्रतिशत हिस्से का बंटवारा स्थानीय सत्ताधारियों, प्रशासन, पुलिस और पट्टेधारक के बीच होता था।
जिले के मौरंग कारोबार को संरक्षण देने के नाम पर सबसे पहले बनारस फिर आगरा और बाद इटावा के सिंडीकेट ने हाथ आजमाया। इन तीनों में से इटावा का सिंडीकेट जनपद में अपना सिक्का जमा पाने में सफल रहा। इस कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि सत्ता का नजदीकी बताकर ही इस सिंडीकेट ने शासन के पंचम तल से डीएम पर दबाव बनवाया था और इसी हाई प्रोफाइल सेटिंग के नाम पर वह अपना चालीस फीसदी हिस्सा लेता था।
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डीएम अभय के बाद राकेश कुमार थे निपटे
फतेहपुर। आठ जून 2014 को तत्कालीन डीएम अभय के तबादले के बाद यहां डीएम पद पर राकेश कुमार की तैनाती हुई। अपने एक साल के कार्यकाल में राकेश कुमार ने भी उन्हीं पट्टों को फलने-फूलने का खूब मौका दिया। राकेश कुमार के कार्यकाल में खनन माफियाओं ने नदी की बीच धारा से मौरंग निकालने के लिए ओती घाट में पुल तक बना डाला था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जनपद आगमन पर मीडिया ने जब जिले में अवैध खनन का मुद्दा उठाया तो सीएम ने सबसे पहले मंडलायुक्त प्रयागराज को निलंबित कर दिया था। इसके दो दिन बाद सीएम ने लखनऊ से डीएम फतेहपुर राकेश कुमार को भी अवैध खनन कराने और नदी की बीच धारा से मौरंग निकलाने के आरोप में निलंबित कर दिया था।
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