कानपुर देहात। बिकरू कांड की नाबालिग आरोपी कुख्यात अमर दुबे की कथित पत्नी खुशी का जमानती प्रार्थना पत्र मंगलवार को अदालत नेे खारिज कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता ने खुशी की मानसिक स्थिति उच्च स्तर की होने की दलील देकर जमानत देने का विरोध किया। अब बचाव पक्ष जमानत के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेगा। इसके पहले किशोर न्याय बोर्ड ने जमानती पत्र खारिज कर दिया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान खुशी उपस्थिति नहीं रही।
दो जुलाई को चौबेपुर के बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर फायरिंग की गई थी। सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। घटना में विकास दुबे के करीबी अमर दुबे की कथित पत्नी खुशी को भी आरोपी बनाया गया है। किशोर न्याय बोर्ड ने खुशी को नाबालिग घोषित किया था। साथ ही उसका मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया गया था। खुशी की मानसिक स्थिति उच्चस्तर की पाए जाने पर किशोर न्याय बोर्ड ने उसकी जमानत खारिज कर दी थी। इसके बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने एडीजे 13 विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट रणजीत कुमार की कोर्ट में जमानती प्रार्थना दाखिल किया था।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र मिश्रा ने खुशी की मानसिक स्थिति उच्च स्तर की होने की दलील दी। बचाव पक्ष कोई अहम साक्ष्य नहीं दे सका। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि वह जमानत के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
पैनल से मनोवैज्ञानिक परीक्षण की मांग भी खारिज
कानपुर देहात। बिकरू कांड में आरोपी बनाई अमर दुबे की कथित पत्नी खुशी के अधिवक्ता ने उसे नाबालिग बताया था। एंटी डकैती कोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड को मामले में जांच कराने के आदेश दिए थे। किशोर न्याय बोर्ड ने उसका परीक्षण कराया तो घटना के दिन 16 साल 10 महीने 12 दिन की निकली। मनोवैज्ञानिक परीक्षण में उसकी मानसिक स्थित उच्चस्तर की पाई गई। खुशी के अधिवक्ता ने विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रणजीत कुमार की अदालत में पैनल से खुशी का मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। मंगलवार को अदालत ने उसे भी खारिज कर दिया। फिलहाल खुशी बाराबंकी बालिका सुधार गृह में है। वह मंगलवार को अदालत में पेश नहीं हुई।