कानपुर देहात/पुखरायां। ब्रजेश के लापता होने से लेकर आरोपी से मुठभेड़ तक की पुलिसिया कहानी में कई झोल हैं। कई अनसुलझे सवालों के जवाब पुलिस के पास नहीं है। सभी पुलिस अफसर इन सवालों के जवाब देने से कतराते रहे। इस कारण अपहरण और हत्या की पुलिसिया कहानी लोगों को हजम नहीं हो रही है।
1-मेड़ से कुएं तक कैसे पहुंची कार
पुलिस का कहा है कि सुबोध ने धर्मकांटा के सामने ही कार में ब्रजेश की हत्या कर दी। इसके बाद कार से शव ले जाकर कुएं में डाल आया। गांव से निकले रोड से जुड़े चकरोड तक तो कार पहुंच सकती है। मंगलवार को अधिकारियों के वाहन और दमकल वाहन यही तक पहुंचा था। चकरोड से खेत मेें बने कुएं की दूरी दो खेत की है। खेत के दोनों तरफ गीले हैं। पतली मेड़ का ही सिर्फ रास्ता है। ऐसे में कार से कुएं तक शव किस तरह ले जाया गया, इसका जवाब किसी अफसर ने नहीं दिया।
2-धड़ से गर्दन कैसे हो गई अलग
यह भी सवाल उठ रहा है कि रस्सी से गला दबाकर ब्रजेश की हत्या की गई थी तो गर्दन धड़ से अलग कैसे हो गई। ब्रजेश का शव जब कुएं से निकाला गया तो वह पूरी तरह सड़ चुका था। चेहरा तक समझ में नहीं आ रहा था। धड़ से गर्दन अलग थी।
3-मोबाइल नंबर ट्रैस क्यों नहीं
घटना के दूसरे दिन ही परिजनों ने पुलिस को फिरौती मांगे जाने का ऑडियो दे दिया था। बताया था कि ब्रजेश के मोबाइल पर कॉल करने पर फोन उठाने वाले ने अपहरण और 20 लाख फिरौती न देने पर हत्या करने की बात कही थी। इसके बावजूद पुलिस मोबाइल ट्रैस नहीं कर सकी। पुलिस का कहना है कि बात करने के बाद मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया गया था।
4-रिश्तेदारों पर ही शक क्यों
पुलिस ब्रजेश के रिश्तेदारों पर ही शक करती रही। ब्रजेश के बुआ और मौसी के लड़कों को उठाकर पीटती रही। रिश्तेदारों पर शक की कोई वजह भी पुलिस नहीं बता पा रही है। परिजनों का कहना है कि वह बार-बार कह रहे थे कि उसके दोस्त वारदात को अंजाम दे सकते हैं, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।
5-भागने की हिम्मत कैसे आई
ब्रजेश का शव बरामद होने के बाद पुलिस ने घटना का खुलासा किया। हत्यारोपी को मीडिया के सामने पेश तक नहीं किया। हत्यारोपी सुबोध को भोगनीपुर कोतवाली में ही रखा गया। पुलिस के अनुसार शाम सात बजे भोगनीपुर कोतवाल पुलिस जीप में सुबोध को बैठाकर चप्पल व मोबाइल बरामद करने धर्मकांटा जा रहे थे। इसी दौरान वह दरोगा की रिवाल्वर छीनकर भागने का प्रयास करने लगा और मुठभेड़ में गोली उसके पैर में लग गई। सवाल यह है कि इतने पुलिसकर्मियों के साथ होने पर भी सुबोध यह हिम्मत कैसे कर गया।