कानपुर। कुख्यात बदमाश वसीम उर्फ बंटा और उसके भाई नईम के पासपोर्ट बनवाने में कर्नलगंज पुलिस और एलआईयू की भूमिका सवालों के घेरे में है। आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद दोनों गैंगेस्टर भाइयों के पासपोर्ट के सत्यापन की रिपोर्ट पुलिस और एलआईयू ने उनके पक्ष में लगाई। ये रिपोर्ट दो बार लगाई गई। पहली बार पासपोर्ट बनने के दौरान और दूसरी रिपोर्ट पिछले साल नवीनीकरण के दौरान लगाई। यह खुलासा एसटीएफ की जांच में हुआ है।
एसटीएफ कानपुर यूनिट ने मंगलवार को गैंगेस्टर वसीम उर्फ बंटा और भाई नईम को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों कर्नलगंज थाना क्षेत्र के गम्मू खां का हाता के रहने वाले हैं। एसटीएफ सीओ टीबी सिंह ने बताया कि जांच में पता चला कि 2009 में वसीम ने सही पते पर अपना पासपोर्ट बनवाया। उस पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बाद भी पुलिस और एलआईयू ने उसके पक्ष में रिपोर्ट लगाई। सीओ ने बताया कि इसी तरह नईम का भी पासपोर्ट बना। ऐसे में तत्कालीन कर्नलगंज इंस्पेक्टर, संबंधित तत्कालीन चौकी इंचार्ज और तत्कालीन क्षेत्रीय एलआईयू अधिकारी जांच के घेरे में हैं।
मिलीभगत कर पक्ष में लगाई रिपोर्ट : पासपोर्ट का आवेदन करने के बाद पासपोर्ट कार्यालय से संबंधित एसपी दफ्तर और एलआईयू सत्यापन के लिए दस्तावेज भेजे जाते हैं। इसमें आवेदक के पते का सत्यापन करने के साथ ही उसका आपराधिक इतिहास है या नहीं इसका विवरण देना होता है। अगर आपराधिक इतिहास है तो उसका पासपोर्ट नहीं बनता है। मगर यहां वसीम व नईम पर लूट-हत्या के 30 मामले दर्ज होने के बावजूद पासपोर्ट बन गए। आशंका है कि ये पूरा फर्जीवाड़ा मिलीभगत से किया गया।
जन्मतिथि में हेरफेर, एजेंट भी रडार पर : सीओ एसटीएफ के मुताबिक वसीम के पासपोर्ट में जन्मतिथि में हेरफेर है। पासपोर्ट में एक जनवरी 1970 दर्ज है, जबकि अन्य दस्तावेजों में एक जनवरी 1985 है। जन्मतिथि के लिए कौन सा दस्तावेज वसीम ने लगाया, इसकी जानकारी पासपोर्ट कार्यालय से एसटीएफ ने मांगी है। उधर वीजा पासपोर्ट बनवाने वाला एजेंट भी एसटीएफ की रडार पर है। आशंका है कि उसने भी इसमें हेरफेर किया है।