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Kanpur News: लाजपत भवन में आज से क्राफ्ट रूट प्रदर्शनी, 22 राज्यों के 100 से अधिक कारीगर लेंगे हिस्सा

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प्रदर्शनी के बारे में जानकारी देतीं अनार बेन पटेल व मौजूद अन्य लोग। - फोटो : संवाद
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कानपुर। गुजरात की पटोला साड़ी हो या शुद्ध देसी घी से बनी क्रीम या फिर बंगाल का जामदानी का काम...देश के कोने-कोने में समाई सांस्कृतिक और पारंपरिक हस्तकला का अनूठा संगम चार अक्तूबर से लाजपत भवन में देखने को मिलेगा। यहां आठ अक्तूबर तक सुबह 10 से रात नौ बजे तक पांच दिवसीय क्राफ्ट रूट प्रदर्शनी आयोजित होगी। शुभारंभ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी।
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शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में ग्रामश्री संस्था की शाखा क्राफ्ट रूट्स की संस्थापक अनार बेन पटेल ने बताया कि प्रदर्शनी में 22 राज्यों के 100 से अधिक कारीगर 110 से अधिक क्राफ्ट का प्रदर्शन करेंगे। इनमें ओडिशा के प्रसिद्ध पट्टचित्र, राजस्थान की लाख की चूड़ियां, उत्तर प्रदेश की कांच की कलाकृतियां, राजस्थान की मिनिएचर पेंटिंग्स समेत अनेक दुर्लभ और अनूठी कलाएं शामिल हैं। इसमें 50 से लेकर दो लाख रुपये तक के उत्पाद देखने को मिलेंगे।

ग्रामश्री संस्था और क्राफ्ट रूट्स के प्रयास

1995 में गुजरात की प्रथम महिला मुख्यमंत्री और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से स्थापित ग्रामश्री संस्था का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करना है। संस्था ने अब तक 75,000 से अधिक महिलाओं को कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने में मदद की है।
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ग्रामश्री संस्था की शाखा क्राफ्टरूट्स 2008 से भारतीय हस्तशिल्प कारीगरों को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुत कर रही है। इसने भारत के विभिन्न मेट्रो शहरों के साथ दुबई, अमेरिका, सिंगापुर जैसे देशों में कुल 76 सफल प्रदर्शनियां आयोजित की हैं।



घी को 10 हजार बार मथ कर तैयार होती है नाइट क्रीम
बड़ौदरा के एक गांव से आईं यशस्वी ने बताया कि इंटीरियर डिजाइन का कोर्स करने के बाद उन्होंने गांव की महिलाओं के लिए कुछ करने का सोचा। वह आर्गेनिक सौंदर्य उत्पाद पर काम कर रही हैं। नाइट क्रीम, हेयर ऑयल जैसे कई उत्पाद बना रही हैं। उन्होंने बताया कि नाइट क्रीम की 30 ग्राम की 60 डिब्बियां बनाने के लिए गाय के दूध से तैयार देसी घी को करीब 10 हजार बार मथना पड़ता है।

इसके बाद जो क्रीम तैयार होती है वह शरीर की कई लेयर तक पहुंचती है। 15 महिलाओं की टीम करीब 20 से अधिक प्रोडक्ट पर काम कर रही है। बंगाल से आईं रीना पाल ने जामदानी और हुगली से आए राहुल ने मटका सिल्क के काम के बारे में बताया।
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