टेनरियों की तरह अब कानपुर में गंगा किनारे स्थापित दूसरे उद्योगों को भी अपने संसाधनों में कटौती करनी पड़ेगी। गंगा को स्वच्छ और निर्मल रखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) अब किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। सीपीसीबी की तरफ से यह निर्देश जारी कर दिया गया है।
जाजमऊ की टेनरियों की तालाबंदी खोलने से पहले प्रत्येक टेनरी से 50 प्रतिशत संसाधनों की कटौती कराई गई। बाकी जो टेनरियां खोली जानी हैं, उनमें भी कटौती की जा चुकी है। केंद्र सरकार इसी तर्ज पर अब दूसरी इंडस्ट्री में भी यही व्यवस्था लागू कर रही है। गुरुवार को शहर आई सीपीसीबी की टीम ने टेक्सटाइल, बैटरी और दूसरी इंडस्ट्री को दो टूक कह दिया है कि उन्हें अपनी इंडस्ट्री में पानी और केमिकल प्रयोग की मात्रा में ज्यादा से ज्यादा कमी लानी होगी।
इसके लिए सभी को 31 अगस्त तक संकल्प पत्र भरकर भी बोर्ड को भेजना होगा। सीपीसीबी की टीम दो महीने में फिर कानपुर का दौरा करेगी। उस समय तक सभी इकाइयों के संचालकों को दिए गए सुझाव पर अमल करना जरूरी होगा। जो ऐसा नहीं करेंगे, उनकी इंडस्ट्री में तालाबंदी करने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं होगा।
कानपुर में इंडस्ट्री की स्थिति
टेक्सटाइल इंडस्ट्री (डाइंग) - 45
बैटरी इंडस्ट्री - 40
डाइंग और बैटरी इंडस्ट्री का दायरा बहुत छोटा है। बड़ी औद्योगिक इकाइयों के बजाय इन पर जानबूझ कर दबाव बनाया जा रहा है। नमामि गंगे के तहत कितने नालों को बंद करने और गंगा में गिरने से रोकने का फैसला हुआ था उन पर कुछ नहीं हो रहा है।
- मनोज बंका, प्रदेश अध्यक्ष पीआईए