कानपुर। गोशाला के लिए पट्टे पर दी गई रानीघाट की जमीन संचालकों ने बेचकर करोड़ों का खेल कर लिया। अब इस जमीन पर गोशाला के बजाय वसंत कुंज नाम से फ्लैट खड़े हैं। कानपुर गोशाला की कमेटी के संचालक भी मालामाल हो गए।
कोहना के जमींदार मनोहर सिंह ने 21 नवंबर 1887 को महाराज सूरज कुमार पांडेय को गोशाला के लिए रानीघाट की 7 बीघा 6 बिस्वा जमीन दान में दी थी। तय हुआ था कि इसका सालाना लगान कुछ रुपये देना होगा। यदि लगान नहीं दिया गया तो अदालत की मदद से वसूला जाएगा। अगर गोशाला बंद हो जाएगी तो पट्टेदार को जमीन वापस कर दी जाएगी। गोशाला 1932 में बंद हो गई लेकिन जमीन पट्टेदार को वापस नहीं दी गई। धीरे-धीरे समय बीतता गया और यह जमीन कानपुर गोशाला कमेटी की संपत्ति हो गई। तत्कालीन महामंत्री पुरुषोत्तम तोषनीवाल ने 9 सितंबर 2004 को जिला जज कोर्ट से इस जमीन (वर्तमान में 4/274 ए रानीघाट) को बेचने के लिए अनुमति मांगी। इस पर जिला जज ने आदेश दिया कि कुल 4710.9 वर्ग मीटर जमीन को 55 लाख रुपये में पट्टे पर दिया जा सकता है। साथ ही उस धनराशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा करा दिया जाए। आदेश के मुताबिक महामंत्री ने 10 नवंबर 2006 को स्वरूप नगर निवासी मोहन सेठ को 1672 वर्ग मीटर जमीन पट्टे पर लिख दी। बाद में 2800 वर्ग मीटर जमीन 15 नवंबर 2006 को और लिख दी। मोहन सेठ ने जमीन को होम्स कंपनी के नाम से खरीदा था और पट्टे की जमीन पर नियमविरुद्ध तरीके से फ्लैट बनवा दिए। एक फ्लैट 40 लाख रुपये में जया द्रोण दीक्षित पत्नी दीपांकर को बेच दिया। इसके अलावा अन्य फ्लैट भी बेच दिए। सूत्रों का कहना है कि कानपुर गोशाला कमेटी से जुड़े एक पदाधिकारी लेनदेन कर इस जमीन को बेचने की डील तय कर चुके है।