कानपुर गोशाला सोसाइटी कमेटी की प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक में गोशाला में चल रहे गोलमाल की पोल फिर खुल गई। गड़बड़ियां दूर करने के दावे के साथ बनाई गई नई कमेटी पिछले छह माह में गोशाला में मृत गायों की सही संख्या तक न बता सकी। गायों को दिए जाने वाले चारे-भूसी में भी कमी पाई गई। गोशाला के खर्च का हिसाब-किताब भी नहीं मिला। इस पर अध्यक्ष ने सिर्फ नाराजगी जताई। गोशाला की बेशकीमती संपत्तियों पर कब्जे का महत्वपूर्ण बिंदु बैठक में उठा ही नहीं।
कपड़ा कमेटी कार्यालय जनरलगंज में हुई प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक का मुख्य एजेंडा गोशाला कमेटी की कार्यप्रणाली जांचना, बेशकीमती संपत्तियों को कब्जों से मुक्त कराने पर विचार, डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स कानपुर के खिलाफ कोर्ट जाने का था लेकिन जमीन पर कब्जों और मुक्त कराने पर कोई बात ही नहीं की गई।
उपाध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने जानकारी दी कि छह माह में कुल 26 गोवंश की मौत हुई है जबकि रजिस्टर में मृत्यु संख्या 28 दर्ज पाई गई। इसी प्रकार गोवंश को दिए जाने वाले हरे चारे, चूनी और भूसे की मात्रा में भी निर्धारित मात्रा से कमी पाई गई। इस पर अध्यक्ष तिलकराज शर्मा ने आपत्ति जताई। भौंती गोशाला में छह माह में कई गायों की मौत और उन पर खर्च होने वाले राशि की जानकारी प्रस्तुत न करने पर महामंत्री श्याम अरोड़ा की निंदा की गई।
सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि हर महीने का हिसाब-किताब रखना चाहिए और उसकी पूरी जानकारी सदस्यों को दी जाए।