मुठभेड़ में घायल उपेंद्र उर्फ रॉकी के मामले में सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-1 अभिनितम उपाध्याय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने एसपी समेत तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मऊदरवाजा अजब सिंह और मोहम्मदाबाद के विनोद कुमार शुक्ल को आदेश दिया कि सात दिन में 21 मार्च की मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम पर थाना मोहम्मदाबाद अथवा निकटवर्ती थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। इसकी विवेचना वरिष्ठ अधिकारी के पर्यवेक्षण में कराई जाए।
मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव मुरहास कन्हैया में जसमई मार्ग पर 21 मार्च की रात पुलिस ने मुठभेड़ में मऊदरवाजा थाने के गांव नगरिया निवासी उपेंद्र उर्फ राकी को गिरफ्तार किया था। उसके बाएं पैर में गोली लगी थी। उसने जमानत के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र दिया। उसने अपने बयान में कहा कि पुलिस उसे घर से उठाकर लाई थी और सुनसान जगह पर ले जाकर पैर में गोली मार दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को राजू उर्फ राजकुमार बनाम उत्तर प्रदेश मामले में मुठभेड़ को लेकर बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए थे। गंभीर चोट लगने पर पुलिस टीम के विरुद्ध एफआईआर, स्वतंत्र विवेचना और घायल का मजिस्ट्रेट अथवा चिकित्साधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराने की व्यवस्था शामिल है। अदालत ने पूरक मेडिकल रिपोर्ट 9 मई को तैयार किए जाने पर भी सवाल उठाए। आदेश में कहा कि प्रथमदृष्ट्या हाईकोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। पुलिस को एक और अवसर देते हुए सात दिन में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। इसका पालन न होने पर मामले को हाईकोर्ट में अवमानना कार्रवाई के लिए भेजने पर विचार करने की बात कही। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।