केस डायरी न मिलने के कारण चर्चित बेहमई कांड का फैसला अटका हुआ है। बिधनू थानाक्षेत्र के फतेहपुर गोही निवासी जालिम सिंह हत्याकांड में भी वही स्थिति थी। यहां तक कि वादी और अभियुक्त के परिवारों के बीच अब मेलभाव भी है। सजा से फिर दुश्मनी पनपने की आशंका है।
इन आधार पर अभियुक्तों को बरी करने की अपील बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामनगीना सिंह ने की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी संजय झा ने तर्क रखा कि सौहार्द्र के लिए पीड़ित को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
केस डायरी नहीं मिली, लेकिन गवाहों ने मामले को साबित कर दिया है, इसलिए अभियुक्त सजा के हकदार हैं। जालिम की हत्या से साबित होता है कि अभियुक्त मामूली सी बात पर भी किसी की हत्या करने से नहीं चूकेंगे। इसलिए कठोर दंड दिया जाए। वहीं बचाव पक्ष ने अभियुक्तों के बूढ़े, गरीब और कानून के जानकार न होने से फैसले की अपील करने में अक्षम बताते हुए कम सजा देने की बात कही थी।
दोबारा बयान में पलटा चश्मदीद
चश्मदीद गवाह 80 साल का सौखी जब 38 साल बाद दोबारा गवाही देने पहुंचा तो वह मुकर गया। कोर्ट ने माना कि गवाह अभियुक्तों के प्रभाव में आ गया है, क्योंकि पहले 14 पन्नों के बयान और जिरह में वह बयान पर अडिग था। फैसला आने से पहले वर्ष 2019 में ही अभियुक्त अनूप सिंह और गवाह सौखी दोनों की मौत हो चुकी है।
परिवाद में दर्ज बयान बना नासूर
अभियुक्त अनूप सिंह ने भी जालिम सिंह और उसके परिवारवालों के खिलाफ एक परिवाद दाखिल किया था। इसमें भी रामेश्वर ने जालिम द्वारा मारपीट करने और घटना के दिन आत्मरक्षा में गोली चलाने की बात स्वीकार की थी। यह मुकदमा लंबित चल रहा है।
चार्जशीट का आधार होती केस डायरी
किसी भी मुकदमे में केस डायरी सबसे अहम मानी जाती है। घटना के बाद पुलिस विवेचना का तारीख दर तारीख सारा विवरण केस डायरी में दर्ज किया जाता है। इसी आधार पर पुलिस कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल करती है।