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कोरोना से विकसित हो रही हर्ड इम्युनिटी, घातक नहीं हो पा रहा रोग, कनपुरियों में अधिक तेजी से बन रहे एंटी बॉडीज

Thu, 23 Apr 2020 10:40 AM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
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कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर- कोरोना पॉजिटिव आने वालों की संख्या गुणात्मक है लेकिन इसके बीच हर्ड इम्युनिटी (सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता) के संकेत भी मजबूती से दिखने लगे हैं। कोरोना संक्रमित लोगों मेें एंटी बॉडीज (रोग प्रतिकारक) जल्दी विकसित हो रही हैं। इससे राहत की बात यह है कि कोरोना यहां अधिक घातक, जानलेवा साबित नहीं हो पाएगा।
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अभी तक मिले 74 रोगियों में 73 में कोरोना संक्रमण लेवल-वन पर ही है। किसी भी रोगी को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी। सिर्फ एक कोरोना संक्रमित रोगी की मौत हुई है। उसका भी कारण रीनल फेल्योर, हार्ट, क्रोनिक डायबिटीज रही है।

कोरोना के अभी तक सात रोगी पॉजिटिव से निगेटिव हुए हैं। ये 14 दिन अस्पताल में रहे लेकिन इनके शरीर में वायरस लोड बिल्कुल नहीं बढ़ा। संक्रमण जिस स्तर पर था, उतने पर ही रहा। इसके अलावा सीएचसी सरसौल में भर्ती 21 लोगों की दूसरी रिपोर्ट अभी नहीं आई है लेकिन उनका संक्रमण लेवल भी अभी एक पर ही है।
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कुली बाजार, मछरिया, जाजमऊ अशरफाबाद के कोरोना संक्रमित अभी तक एसिम्प्टोमैटिक हैं। इसका मतलब है कि उनमेें कोरोना के लक्षण नहीं उभरे हैं। इससे एक बात और भी स्पष्ट हो रही है कि जिस तरह धड़ाधड़ कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, उससे हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है।
 
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इससे लोगों में रोग के खिलाफ प्राकृतिक टीकाकरण हो जाता है। फिर रोग घातक नहीं रहता है। अमेरिकी मेडिकल इमरजेंसी विशेषज्ञ और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के गेस्ट फैकल्टी डॉ. कृष्ण कुमार का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी से रोग कम घातक हो जाएगा।

वहीं सीएचसी, सरसौल के प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि रोग नहीं बढ़ा, इसका मतलब है कि लोगों में एंटी बॉडीज विकसित हो गया है। इसके बाद रोग फिर कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। उनके यहां के सभी 21 कोरोना संक्रमित लेवल वन में ही हैं।

एंटी बॉडीज के अध्ययन से मिलेगी संजीवनी
कोरोना का सबसे बड़ा खतरा वहीं पैदा हुआ जहां उसके खिलाफ शरीर में एंटी बॉडीज देर में बन रही हैं। शहर के संक्रमित लोगों में एंटी बॉडीज इतनी जल्दी कैसे बन रही है, इसका जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर अध्ययन करेगा। कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी का कहना है कि यह भी देखेंगे कि पहले टीकाकरण से बनी एंटी बॉडीज से कोरोना की जंग में व्यक्ति को क्या लाभ मिला। इससे कोरोना के इलाज का नया रास्ता मिल सकता है।
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