कोरोना से बचाव के वास्ते वेंटिलेटर के लिए जितनी हाय-तौबा मची थी, वह सब बेकार रही। सारे वेंटिलेटर धरे के धरे रह गए हैं। कोरोना संक्रमित किसी रोगी को अब तक इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी। शहर में अब तक 270 रोगियों में एक में भी कोरोना का मुख्य लक्षण निमोनिया उभरा ही नहीं है। अब तक 34 कोरोना संक्रमित ठीक होकर घर भी जा चुके हैं।
उनकी पॉजीटिव के बाद लगातार तीन रिपोर्ट निगेटिव आईं। दवाएं भी खाईं लेकिन कोरोना का निमोनिया वाला वो लक्षण नहीं उभरा। विशेषज्ञ इसके पीछे मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को वजह बता रहे हैं। चीन, अमेरिका, ईरान, इटली आदि देशों में कोरोना की भयावहता देखकर देश में भी हर जगह वेंटिलेटर की व्यवस्था को लेकर हंगामा मचा था।
शहर में भी 130 वेंटिलेटर की व्यवस्था कर ली गई। रोगियों का आंकड़ा 250 का आंकड़ा भी पार कर गया लेकिन वेंटिलेटर वैसे के वैसे धरे हैं। छह कोरोना संक्रमित रोगी मरे जरूर हैं लेकिन उनमें पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन, गुर्दे फेल व हृदय रोग था। इसके अलावा वह बुजुर्ग भी रहे। उनकी मौत की वजह पुराने रोग रहें। एहतियातन जांच में कोरोना पॉजीटिव निकले।
एनआरआई सिटी के बुजुर्ग में कोई ऐसा घातक रोग नहीं था, इस कारण वह 14 दिन में निगेटिव हो गए। अब सवाल यह है कि रोगियों में कोरोना का मुख्य लक्षण क्यों नहीं उभरा? इसके लिए विशेषज्ञ भारतीयों के मजबूत इम्युनिटी को मुख्य वजह बता रहे हैं। एक तो मजबूत इम्युनिटी ने कोरोना को फेफड़ों पर अधिक असर नहीं डालने दिया।
इसके साथ ही लोगों में एंटी बॉडीज बहुत तेजी से बनीं। एंटी बॉडीज तेजी से क्यों बनीं? जीएसवीएम मेडिकल कालेज ने इस पर आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर शोध का खाका तैयार कर लिया है। 19 कोरोना संक्रमित को ठीक करने वाले सीएचसी सरसौल के प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि सिर्फ इम्युनिटी सिस्टम की मजबूती ने कोरोना को घातक नहीं होने दिया।