देश में कोरोना मरीजों की संख्या तो बढ़ रही है पर इसकी रफ्तार धीरे-धीरे धीमी होती जा रही है। कानपुर आईआईटी के प्रोफेसरों ने मरीजों की संख्या के डाटा अध्ययन से यह विश्लेषण किया है। आईआईटी के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर महेंद्र के वर्मा ने बताया कि 17 अप्रैल तक के आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है।
इसमें मरीजों की संख्या आठ हजार से 16 हजार होने में करीब साढ़े सात दिन का समय लगा। चार से आठ हजार मरीज होने में साढ़े सात दिन से कम समय लगा। हालांकि कितना कम समय लगा, इसका विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मरीजों के डाटा का अध्ययन कर कोरोना का देश में क्या ट्रेंड है, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पता किया जा रहा है कि भविष्य में इसकी रफ्तार धीमी रहेगी या ज्यादा।
उन्होंने बताया कि एक अप्रैल के आसपास प्रतिदिन करीब 700 मरीज देश में पॉजिटिव पाए जा रहे थे। जबकि वर्तमान में करीब 1300 से 1500 मरीज पॉजिटिव मिल रहे हैं। संख्या बढ़ रही है पर संक्रमण के फैलाव का समय भी बढ़ रहा है। इससे लग रहा है कि भविष्य में कोरोना का असर धीरे-धीरे कम पड़ेगा।
बताया कि कोरोना के डाटा अध्ययन कार्य में सौम्यदीप चटर्जी, असद अली तथा सदर आलम भी सहायक कार्यकर्ता के रूप में सहयोग कर रहे हैं। इस डेली डाटा के आधार पर अध्ययन कर एक मॉडल विकसित करने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने संभावना जताई कि रेड-ऑरेंज जोन के अलावा हॉटस्पॉट में अगर सख्ती बरती गई तो भविष्य में कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
भारत को जल्द मिल सकती है राहत
कानपुर आईआईटी के प्रोफेसर महेंद्र कुमार वर्मा ने चार देशों के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर बताया है कि जल्द ही भारत को इस महामारी से राहत मिल सकती है। उन्होंने साउथ कोरिया, यूएसए, फ्रांस और स्पेन के देशों का आंकड़ा निकाला जिसके आधार पर पता चला कि इन देशों में बीमारी का ग्राफ तेजी से बढ़ा और कम होते होते काफीसमय लगा। भारत में भी ग्राफ तो तेजी से बढ़ा लेकिन इसकी रफ्तार जल्द ही धीमी पड़ गई।