कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन के तीसरे ट्रायल का अंतिम चरण पूरा हो गया है। ट्रायल आर्यनगर स्थित प्रखर अस्पताल में पूरे हुए हैं। तीनों चरणों में किसी वॉंलिटियर को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। तीसरे ट्रायल में एक हजार लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई थी। वैक्सीन ट्रायल के चीफ इंवेस्टीगेटर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि तीसरा चरण भी पूरा हो गया है।
स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन के पहले ट्रायल की शुरुआत जुलाई में हुई थी। इसमें 33 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। इसके बाद सितंबर में दूसरा ट्रायल हुआ। इसमें 42 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। इसके बाद तीसरे चरण में एक हजार लोगों को डोज दी गई। इनका परिणाम अच्छा रहा है। वॉलिंटियर के शरीर में एंटी बॉडीज की संख्या अच्छी रहीं और 98 दिन बाद भी एंटी बॉडीज बढ़ती हुई पाई गईं।
डॉ. कुशवाहा का कहना है कि यह शहर के लिए उपलब्धि है कि स्वदेशी वैक्सीन का ट्रायल हुआ। दूसरी तरफ जाइडल कैडिला और रूसी वैक्सीन के तीसरे ट्रायल के लिए भी अनुमति मिल गई है। रूसी वैक्सीन के ट्रायल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैलट के फिजिशियन डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि रूसी वैक्सीन के तीसरे ट्रायल के लिए अनुमति मिल गई है, तिथि तय की जानी है।
प्लेसीबो की होगी अधिसूचना
कोवाक्सिन के तीनों चरण पूरे होने के बाद अब प्लेसीबो की अधिसूचना जारी होगी। उसके बाद उन्हें वैक्सीन की डोज दी जाएगी। प्लेसीबो उसे कहते हैं कि जिसमें वायरस नहीं होता है, वह दिखता तो वैक्सीन की तरह है लेकिन साधारण द्रव्य होता है। प्लेसीबो कौनसी खुराक है, यह पता सिर्फ ट्रायल संयोजन करने वाले व्यक्ति को होता है। इसमें कोड डाला जाता है। डॉ. कुशवाहा ने बताया कि प्लेसीबो वाले व्यक्ति को बाद में वैक्सीन लगाई जाएगी।