कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
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कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन के ट्रायल के पहले चरण में जिन 33 वॉलंटियर के ब्लड सैंपल लिए गए हैं, उनमें एंटीबॉडीज की जांच पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में होगी। इस वैक्सीन के लिए कोरोना वायरस का स्ट्रेन इसी इंस्टीट्यूट ने दिया है।
वॉलंटियर को पहले .5 एमएल और फिर एक एमएल की डोज दी गई थी। आर्य नगर स्थित प्रखर अस्पताल से ब्लड सैंपल इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली भेजे गए हैं। जहां से ये पुणे भेजे जाएंगे।
वहां सप्ताह भर के अंदर एंटीबॉडीज जांच होगी। अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सैंपल माइनस 80 डिग्री सेंटीग्रेड पर भेजे गए हैं। किसी वॉलंटियर में कोई साइड इफैक्ट नहीं है। एक-दो को हल्के चकत्ते और बुखार के सामान्य लक्षण थे।
पहला चरण सफल होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा। वॉलंटियर के सैंपल 84 दिन के बाद फिर लिए जाएंगे। इससे तय होगा कि वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज की बढ़त शरीर में कब तक होती है। और ये कितने दिन तक प्रभावी रहती है।