डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) को प्रदेश सरकार के कोरोना माइक्रो मैनेजमेंट की हकीकत परखनी है तो उसे गांवों का एक चक्कर जरूर लगाना चाहिए। गांवों में कोरोना संक्रमण से सैकड़ों मौतें हो गईं। अधिकतर सरकारी अस्पताल बंद पड़े हैं। आरआरटी (रैपिड रेस्पांस टीम) भी दस-बीस लोगों की जांच कर पूरे गांव की सेहत परख लेने की अलौकिक शक्ति से लैस सी हो गई है।
भीतरगांव और घाटमपुर ब्लॉक में आरआरटी ने गांवों में घर-घर जाकर बुखार पीङ़ित या उनके परिजनों की एंटीजन किट से कोविड जांच का दावा तो किया है, लेकिन आकड़े बताते हैं कि यह सरासर झूठ है। घाटमपुर, पतारा और भीतरगांव के कुल 310 गांवों में घर-घर जांच का अभियान चलाकर सिर्फ 4977 लोगों की जांच की गई।
118 गांवों में 1205 की जांच
घाटमपुर सीएचसी में चले अभियान में ब्लॉक के 118 गांवों में आरआरटी पहुंची और 1205 लोगों की एंटीजन किट से जांच की। यानी हर गांव में औसत 11 लोगों की जांच एंटीजन से की गई। इनमें 53 कोरोना संक्रमित मिले। घर-घर जांच होती तो संक्रमित मरीजों की संख्या कुछ और होती।