कोरोना का संक्रमण बढ़ते ही हैलट में पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) किट का संकट होने लगा है। शुक्रवार को कोविड-19 वार्डों में जरूरत से कम किट दी गई। कोरोना वार्ड के कुछ कर्मचारियों को एचआईवी किट पहनाकर ही काम चलाया जा रहा है। जबकि एचआईवी किट में न तो मास्क होता है और न ही फेस कवर। पीपीई किट का करीब 10 दिन का ही स्टाक बचा है। जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो कोरोना मरीजों के इलाज में खतरा बढ़ जाएगा।
हैलट के मैटरनिटी ब्लॉक में बने कोविड-19 वार्ड, फ्लू ओपीडी, न्यूरो साइंस सेंटर के कोविड-19 वार्ड और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की लैब में रोज करीब 55-60 पीपीई किट की जरूरत पड़ती है। लेकिन जरूरत के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को पड़ताल करने पर पता चला कि मैटरनिटी ब्लॉक के कोविड-19 वार्ड और फ्लू ओपीडी में 30 से 35 पीपीई किट की जरूरत रहती है, लेकिन 15 किट ही दी गई। शेष 15 एचआईवी किट देकर काम चलाया गया। न्यूरोसाइंस सेंटर स्थित कोविड-19 वार्ड में रोज 15 पीपीई की डिमांड है पर वहां भी 7-8 किट ही दी जा रही हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 10 किट की ही आपूर्ति हुई।
शासन ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को एचएलएल से पीपीई किट खरीदने के निर्देश दिए थे। कॉलेज प्रशासन ने एचएलएल को 5 अप्रैल को पीपीई किट का आर्डर देने के साथ तीस लाख रुपये अग्रिम भुगतान भी कर दिया लेकिन अभी तक किट की आपूर्ति नहीं हुई। एचएलएल की 1186 रुपये की किट में बॉडी कवर शूट, हेड कवर, शू कवर के साथ एन 95 मास्क, चश्मा कवर, ग्लव्स शामिल है।
कॉलेज व इससे संबद्ध हैलट प्रशासन को उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से 575 किट मिलनी थी। इसके लिए एक हफ्ते पहले पत्र भी आया, लेकिन कॉरपोरेशन की किट घटिया होने की वजह से चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने कानपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में इस किट के उपयोग पर रोक लगा दी। इस संबंध में हैलट में आदेश भी आ गया है। इससे मेडिकल कॉलेज और हैलट में पीपीई किट की कमी होने लगी है।
मेडिकल कॉलेज और हैलट में कोरोना संबंधित मरीजों के इलाज आदि में रोज डेढ़ सौ पीपीई किट की जरूरत है, पर इतनी किट नहीं मिल पा रही हैं। पीपीई किट के लिए शासन को पत्र लिखा है।
आरके मौर्या, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, हैलट