कोरोना के जो रोगी ठीक हो गए हैं, उनके शरीर के तत्वों की जांच से कोविड-19 से निजात का नुस्खा मिलेगा। इन रोगियों का अध्ययन करके उन्हें पहले हुईं बीमारियों और टीकाकरण का ब्योरा लिया जाएगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर इस संबंध में शोध करेगा। साथ ही मेडिकल कॉलेज आईआईटी से पीपीई किट, मास्क आदि लेगा। चिकित्सा विशेषज्ञ आईआईटीयंस को पीपीई किट और मास्क में सुधार के संबंध में मशविरा भी देंगे।
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी की अध्यक्षता में विभागाध्यक्षों और चिकित्सा विज्ञानियों की बैठक शनिवार को हुई। इसमें पीपीई किट और मास्क की कमी पर चिंता व्यक्त की गई। तय हुआ कि पीपीई किट और मास्क के संबंध में सोमवार को आईआईटी के अधिकारियों से बात की जाएगी। कॉलेज ने शोध का प्रस्ताव भी तैयार किया है। किट का परीक्षण डीआरडीओ से भी कराया जाएगा। इसके साथ ही पीपीई किट ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए कहा गया है जिससे पहनने वाला पहचान में आ सके। किट में यह भी व्यवस्था करने के लिए कहा गया है कि डॉक्टर बाथरूम जाएं तो उन्हें किट उतारनी न पड़े।
बायो बैंक बनाएंगे
वायरस पर रिसर्च के संबंध में बायो केमिस्ट्री विभाग में एक बायो बैंक बनाने का निर्णय लिया गया है। इसमें वायरस को शोध के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि कोरोना पर विस्तृत शोध कराने की तैयारी हो चुकी है। जो रोगी ठीक हो गए हैं। उनके प्लाज्मा का भी अध्यक्ष होगा। इसमें आईआईटी के इंजीनियरों को भी शामिल करेंगे।
आईआईटी में डॉक्टरों के लिए क्वारंटीन हाउस
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के लिए आईआईटी में 100 बेड का क्वारंटीन हाउस बनेगा। कोरोना रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टर इसमें रहेंगे। प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि आईआईटी ने स्वीकृति दे दी है। क्वारंटीन हाउस इंटरनेशनल हॉस्टल में बनेगा।