चिकित्सा विज्ञानियों का अनुमान है कि कोरोना शहर के धूल-धुआं और गर्मी वाले माहौल में अधिक घातक नहीं हो पाएगा। इसलिए अगर संक्रमण हुआ भी तो यह फ्लू जैसा ही रहेगा। देशभर में अधिकतर रोगियों के कोरोना के लक्षण न उभरने और बाद में निगेटिव होने के मामलों के बाद इस बिंदु पर रिसर्च शुरू हो गई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भी यहां की आबोहवा में कोरोना की धार कुंद हो जाने के मामले में रिसर्च करेगा। कोरोना सिर्फ जानलेवा बीमारियों वाले मरीजों के लिए खतरा है। प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि एक-दो दिन मेें इथिकल कमेटी की बैठक बुलाई है। इसमें शोध प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेंगे।
कोरोना पॉजिटिव रोगियों के बड़ी संख्या में निगेटिव होने पर चेन्नई, हैदराबाद आदि स्थानों पर शोध शुरू कर दिया गया है। शहर मेें एनआरआई सिटी के कोरोना पॉजिटिव समेत पांच जमाती निगेटिव आ गए हैं। इसके अलावा सीएचसी सरसौल में भर्ती 21 लोग अभी भी कोरोना लेवल-मेें हैं। प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कोरोना से अधिक है। इसी के साथ मेडिकल कॉलेज में भी प्रस्ताव तैयार किया गया है कि शहर या राज्य का जो धूल-धुआं, प्रदूषण और गर्मी का माहौल है उसमें लोगों का सांस तंत्र मजबूत हो गया है, जिससे कोरोना अधिक घातक नहीं हो पाएगा।
इसके विपरीत ठंडेे देशों में जहां साफ-सफाई अधिक है, वहां कोरोना ज्यादा कहर बरपा कर रहा है। चेस्ट फिजिशियन और हैलट के कोरोना प्रभारी डॉ. अवधेश कुमार कहतेे हैं कि नमी में वायरस अधिक तेज होता है। गर्मी का मौसम कोरोना के अनुकूल नहीं है। प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि जल्दी इथिकल कमेटी की बैठक बुलाई है। यह वीडियो कॉंन्फ्रेंसिंग से होगी। शोध जल्दी शुरू होगा।