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16 डॉक्टर समेत 30 कर्मियों की रिपोर्ट निगेटिव

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जूनियर डॉक्टर (नॉन पीजी जेआर) के कोरोना संक्रमित होने के कारण सील किए गए मेडिकल कॉलेज के बीएच-3 हॉस्टल के चैनल पर बुधवार सुबह पुलिस और गार्डों का कड़ा पहरा लगा दिया गया। यहां क्वारंटीन सभी रेजीडेंट व मेस कर्मियों को न तो बाहर निकलने दिया गया और न ही बाहर से किसी को प्रवेश मिला। संक्रमित डॉक्टर के सीधे संपर्क में रहे 16 जूनियर रेजीडेंट, हॉस्टल के बाबू, सफाई कर्मी सहित 14 मेस कर्मियों की कोरोना जांच के लिए नमूने लिए गए। रात को इन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। हॉस्टल के वार्डन डॉ. आरके जौहरी ने बताया कि चार दिन बाद इनकी दोबारा जांच कराई जाएगी।
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हैलट इमरजेंसी के हड्डी रोग विभाग में ड्यूटी कर रहे नॉन पीजी जूनियर डॉक्टर को 28 अप्रैल को देर शाम कोरोना की पुष्टि हुई थी। शहर में पहले डॉक्टर के संक्रमित होने के बाद बीएच-3 हॉस्टल को सील करने के साथ ही इसकी दूसरे मंजिल में सैनिटाइजेशन कराया गया था। यह डॉक्टर इसी हॉस्टल की दूसरी मंजिल के एक कमरे में रहता है। अब कोविड-19 वार्ड में भर्ती है।
मेडिकल कॉलेज के प्रॉक्टर डॉ. जीडी यादव, हॉस्टल वार्डन डॉ. आरके जौहरी, डॉ. प्रगनेश, स्वरूप नगर के सीईओ, स्वरूप नगर थाना प्रभारी आदि ने हॉस्टल का निरीक्षण कर सभी को अपने-अपने कमरे में क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए। वहीं जिन जूनियर रेजीडेंट और इंटर्न ने दूसरे हॉस्टलों से खाना मंगाया था, उनकी टिफिन गेट पर ही रखवा ली गई। और संबंधित को यहीं बुलाकर दी गई।
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प्रॉक्टर ने बताया कि इस हॉस्टल में 60 स्टूडेंट हैं। सभी को क्वारंटीन करने के साथ मिनरल वाटर की केन, मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध करा दिए गए हैं। खाना-नाश्ता इनके दरवाजे के बाहर रखकर बताया जा रहा है। इनमें से किसी में कोरोना के लक्षण नहीं हैं। मेस के सभी कर्मचारी भी अंदर ही हैं। इन्हें बाहर से सब्जी आदि सामान मंगाकर दिए गए हैं।
बुधवार रात में इसी हॉस्टल में रहने वाले एमबीबीएस फाइनल इयर के एक छात्र ने दस दिन से बुखार आने व गले में दिक्कत होने की जानकारी हॉस्टल वार्डन को दी। वार्डन ने बताया कि इस छात्र को तुरंत फ्लू ओपीडी कोरोना जांच के लिए भेज दिया गया है।
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