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बिना टेस्ट डिस्चार्ज किए जा रहे कोरोना मरीज

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कानपुर। कोरोना मरीजों की संख्या के साथ-साथ सरकारी बेपरवाही बढ़ती जा रही है। कोविड-19 सेंटरों से मरीजों को दस दिन में डिस्चार्ज किया जा रहा है, वह भी बिना जांच किए कि मरीज निगेटिव हुआ या नहीं। ठीक उसी तरह जैसे सजा पूरी होने पर व्यक्ति को जेल से रिहा कर दिया जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइन का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन यह बेपरवाही घातक साबित हो सकती है। दूसरों के लिए तो संक्रमण का खतरा है ही, इसके साथ मरीजों की जान पर भी यह बेपरवाही भारी पड़ सकती है। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर को तो दो हफ्ते से अधिक समय लग गया था संक्रमण से उबरने में।
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शिवकटरा निवासी त्रिपाठी जी और उनके दो भाइयों को कोरोना ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था। तीनों भाइयों का इलाज चला। दो भाई रामा हॉस्पिटल स्थित कोविड सेंटर में थे, वहीं एक कांशीराम ट्रॉमा सेंटर में। दस दिनों बाद तीनों को डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज करने से पहले किसी की भी कोरोना जांच कराके नहीं देखा कि वे निगेटिव हुए या नहीं। यही हाल नौबस्ता के एक परिवार का हुआ। दो भाइयों समेत परिवार के कई लोग पॉजिटिव पाए गए। दोनों भाइयों को नारायणा हॉस्पिटल में बने कोविड सेंटर में रखकर इलाज किया गया, लेकिन बिना टेस्ट किए 10 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। इनमें से एक भाई ने बताया कि अस्पताल में कहा गया कि टेस्टिंग कराना चाहें, तो जांच फीस अदा करके करा सकते हैं, वैसे कोई जरूरत नहीं क्योंकि अब पूर्णतया स्वस्थ हैं।
गाइडलाइन बदलती रहती हैं : नए सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्र से इस बारे में जब बात की गई, तो उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार काम हो रहा है। मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने पर अब दस दिन में छुट्टी की गाइडलाइन है, पहले 14 दिनों तक रखने को कहा गया था। समय-समय पर गाइडलाइन बदलती रहती हैं। टेस्टिंग के मसले पर उन्होंने सिर्फ यह कहा कि गाइडलाइन के मुताबिक काम हो रहा है। उन मरीजों की ही छुट्टी की जा रही, जिनको स्वास्थ्य लाभ हो चुका होता है। सभी सेंटरों की पूरी मॉनिटरिंग की जा रही है।
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