कानपुर में कोरोना रोगियों की संख्या बिल्कुल घट जाने की वजह से अब डेल्टा प्लस की पहचान के लिए रोगियों के सैंपल नहीं मिल पा रहे हैं। जो एक-दो कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, वे मानक के अनुरूप नहीं हैं। इन सैंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच करके वायरस की पहचान की जाएगी।
इसी से डेल्टा प्लस पकड़ में आएगा। जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए हर 15 दिन में 15 सैंपल भेजे जाने थे। कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस की पहचान के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जा रही है। कोरोना संक्रमितों के सैंपल लेकर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी दिल्ली भेजे जाते हैं।
हर पखवाड़े 15 सैंपल भेजे जाने हैं लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 10 जुलाई के बाद सैंपल नहीं भेजे हैं। इस दिन सिर्फ 10 सैंपल ही भेजे गए थे। विभागाध्यक्ष डॉ. मधु यादव ने बताया कि रोगियों की संख्या घट गई है। इससे पूरे सैंपल ही नहीं मिल पा रहे।
जीनोम सिक्वेंसिंग के वास्ते लिए जाने वाले सैंपल के मानक के संबंध में विभागाध्यक्ष डॉ. यादव ने बताया कि सीटी वैल्यू 30 से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही उन संक्रमितों का सैंपल लिया जाएगा, जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा हो। जो दोबारा कोविड संक्रमित हुए हों, ऐसे रोगी जो कोविड टीकाकरण के बाद पॉजिटिव हुए हों।