प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल (फाइल फोटो)
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कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी को अहम मान लिया गया है। जिन मॉडरेट (कम गंभीर) रोगियों को प्लाज्मा दिया गया, उनकी स्थिति में बहुत अच्छा बदलाव आया है। जिन रोगियों में कोरोना संक्रमण से निमोनिया की शुरुआत हो गई थी, उन्हें जब प्लाज्मा थेरेपी दी गई तो वे गंभीर स्थिति में नहीं जा पाए और ठीक होने लगे।
इस स्थिति के मद्देनजर शासन ने प्लाज्मा थेरेपी की मॉनीटरिंग अपने हाथ में ले ली है। प्रतिदिन अपर मुख्य सचिव डॉ. रजनीश दुबे को मेडिकल कॉलेज रिपोर्ट भेजेंगे। मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पतालों में भर्ती रोगियों के अलावा निजी कोविड अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी पाने वाले कोरोना रोगियों के संबंध में शासन ने रिपोर्ट तलब की है।
निजी कोविड अस्पताल प्लाज्मा थेरेपी तो दे रहे थे लेकिन इसका फीडबैक जीएसवीएम मेडिकल कालेज के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग को नहीं दे रहे हैं। इस पर सारे अस्पतालों को विभाग की नोडल डॉ. लुबना खान की ओर से नोटिस जारी किया गया है।
हैलट के साथ निजी अस्पतालों की रिपोर्ट भी शासन को भेजी जानी है। अपर मुख्य सचिव इसकी मॉनीटरिंग करेंगे। इसके साथ ही केजीएमयू लखनऊ का ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग कोआर्डिनेशन करेगा। इसके जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर तूलिका चंद्रा को दी गई है।