कानपुर के हैलट अस्पताल में कोविड रोगियों का इलाज जुगाड़ से हो रहा है। डेढ़ महीने पहले जिस दवा कंपनी को आर्डर दिया गया था, उसने सप्लाई नहीं भेजी है। एक हजार इंजेक्शन कार्डियोलॉजी से उधार लिए गए हैं तो एक निजी कंपनी से दवा दान कराई गई।
इसी तरह खींचखांच कर काम चल पा रहा है। शासन से आई टीम ने हैलट प्रबंधन से दवाओं का ब्योरा लिया तो यह बात सामने आई है। हैलट प्रबंधन ने कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट से एनेक्सपेरिन इंजेक्शन उधार लिए हैं। यह दवा खून का थक्का गलाने के काम आती है।
कोविड रोगियों की हालत अधिक बिगड़ने पर नसों में खून का थक्का जमने लगता है। फेफड़ों, मस्तिष्क और हार्ट कहीं भी थक्का जम जाता है। इससे रोगी की मौत हो सकती है। इसके अलावा मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने सिर्फ आइवर वेक्टिन दवा सप्लाई की है।
निजी कंपनी से डाक्टरों ने अपने स्तर से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन डोनेट करवाई है। उप प्राचार्य और हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि दवा कंपनी को तीन बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक दवा सप्लाई नहीं की गई।