कोरोना रोगियों के इलाज में इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने दुनिया का पहला सबसे बड़ा ट्रायल पूरा कर लिया है। इससे जाहिर हुआ है कि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना रोगियों के इलाज के लिए एक सपोर्ट है, हांलाकि अंतिम परिणाम एक जैसा है।
इसके लिए दवा की जरूरत है। ट्रायल में जितने रोगी प्लाज्मा थेरेपी से ठीक हुए, उतने ही बिना थेरेपी दिए इलाज के बल पर ठीक हुए। मौत भी बराबर हुईं। प्लाज्मा थेरेपी से फर्क इतना पड़ा हैै कि ठीक होने वाले रोगी जल्दी निगेटिव हो गए और उनमें आक्सीजन की खपत जल्दी कम हुई है।
इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने देश भर में 436 कोरोना रोगियों को ट्रायल में शामिल किया था। इनमें 235 को प्लाज्मा थेरेपी दी गई और 229 को दवाओं पर रखा गया। दोनों ही श्रेणी के गंभीर रोगियों में मौत का आंकड़ा एक जैसा रहा है।
ठीक होने वाले रोगी भी वैसे ही रहे। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की नोडल डॉ. लुबना खान ने बताया कि जाहिर है कि प्लाज्मा एक सपोर्ट है। अगर रोगी को जल्दी थेरेपी मिल जाए तो उसके ठीक होने में आसानी रहती है। इसके साथ ही आईसीएमआर ने प्लाज्मा की ब्लैक मार्केटिंग से मना किया है।