कानपुर हैलट और संबद्ध अस्पतालों में ऑक्सीजन के छोटे सिलिंडरों की कमी से बुधवार को भी गंभीर मरीजों की सांसें फूलती रहीं। आपूर्तिकर्ता ठेकेदार ने 200 सिलिंडरों की मांग होने के बावजूद शाम तक मात्र 70 सिलिंडर दिए, इस बीच इससे दोगुने से ज्यादा सिलिंडर खाली हो गए। उन्हें भराने के लिए ठेकेदार के प्लांट में भेजा, पर ठेकेदार ने मना कर दिया।
भरुआ स्थित एक सरिया प्लांट में भी दो दिन से 100 बड़े सिलिंडरों के लिए गाड़ी भेजी गई, पर वहां भी सिलिंडर नहीं मिले। अस्पताल में गुरुवार सुबह के लिए भी स्टाक नहीं है। सिलिंडर नहीं मिले तो वार्डों में भर्ती मरीजों की जान पर बन जाएगी। वार्डों में सबसे ज्यादा छोटे सिलिंडरों की ही जरूरत होती है।
काल में हैलट और इससे संबद्ध अस्पतालों में लिक्विड मेडिकल आक्सीजन के अलावा विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के लिए रोज 200 छोटे और 100 बड़े सिलिंडरों की जरूरत पड़ रही है। इन अस्पतालों में मुरारी गैस से ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, पर यह ठेकेदार जरूरत भर की आक्सीजन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
मंगलवार शाम को ठेकेदार ने 110 छोटे सिलिंडर भेजे थे, जिनमें से कुछ रात में और शेष बुधवार सुबह विभिन्न वार्डों में भेज दिए गए। अस्पताल प्रशासन ने सुबह 170 छोटे सिलिंडर भरने के लिए ठेकेदार के पास भेजे, पर 70 छोटे सिलिंडर ही भेजे। इससे हैलट के साथ ही बाल रोग चिकित्सालय, अपर इंडिया जच्चा बच्चा अस्पताल, मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल और संक्रामक रोग चिकित्सालय में आक्सीजन का संकट गहरा गया।
लिक्विड ऑक्सीजन का एक टैंकर आया, दूसरा रास्ते में
हैलट और संबद्ध अस्पतालों में रोज एक टैंकर लिक्विड ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। जानकारों के अनुसार सबसे बड़े अस्पताल हैलट में कम से कम 24 घंटे का स्टाक होना चाहिए, पर मरीज ज्यादा आने से स्थिति गड़बड़ा गई है। हालांकि बुधवार दोपहर मेंलिक्विड ऑक्सीजन का एक टैंकर आ गया, जिससे अस्पताल के तीनों प्लांटों में गैस भरी गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार दूसरा टैंक रास्ते में है, जिसके देर रात तक आने की संभावना है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इस अस्पताल के लिए एक और लिक्विड ऑक्सीजन टैंकर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। ताकि एक टैंकर यहां अनलोड हो, दूसरा रास्ते में और तीसरा प्लांट में भर रहा हो।
हैलट के मेडिसिन विभाग का आक्सीजन प्लांट शुरू
कानपुर हैलट के मेडिसिन विभाग का आक्सीजन प्लांट बुधवार को शुरू हो गया। इससे विभाग के तीन वार्डों में भर्ती सवा सौ से ज्यादा मरीजों को सुचारु रूप से आक्सीजन मिलने लगी। तीमारदारों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ को भी राहत मिली है। हैलट के मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम हाउस की तरफ कई साल पहले आक्सीजन प्लांट लगा था, पर गत वर्ष खराब होने के कारण इसे बंद कर दिया गया था।
कोरोना काल में आक्सीजन का संकट होने से इस विभाग के वार्ड नंबर-14, 15 और 16 में भर्ती कई गंभीर मरीजों की सांसें फूलने लगीं। तीन दिन में पांच मरीजों की मौत हो गई। इसकी वजह समय के आक्सीजन सिलिंडर न मिल पाना बताया जा रहा है। इसके मद्देनजर अस्पताल प्रशासन ने आक्सीजन प्लांट चालू कराया। इस प्लांट में एक साथ बड़े सिलिंडर लगाए जाते हैं, जिनसे पाइपों के माध्यम से बेड तक आक्सीजन पहुंचाई जाती है।