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बेड न मिलने पर बीस हजार में की एंबुलेंसए नहीं बचा सके जान

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कानपुुर देहात। कोरोना संक्रमितों को बेड की उपलब्धता व सुविधाएं देने के दावे खोखले नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल के एल-टू अस्पताल में बेड तक नहीं मिल पा रहे। जिससे उनकी मौत हो रही। इस बात को अब वहां के प्रभारी सीएमएस भी मान रहे हैं।
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अकबरपुर तहसील क्षेत्र में कार्यरत संग्रह अमीन की पत्नी को बुखार आ रहा था। घर के बीमार महिला व बच्चों के अलावा कोई नहीं था। बुुधवार को सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर महिला को पड़ोसी जिला अस्पताल की इमरजेंसी ले गए। जांच में कोरोना संक्रमित मिलने व लगातार कम हो रहे आक्सीजन लेवल के चलते कोविड एल.टू अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी गई। परिजन सामने बने एल.टू अस्पताल गए तो वहां गेट पर स्टाफ नर्स ने बेड खाली न होने का फरमान सुना दिया। महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिया। मजबूरन परिजन बीस हजार रुपये में एंबुलेंस कर लखनऊ ले गए। वहां गुरुवार की सुबह महिला की मौत हो गई। पड़ोसियों के मुताबिक, यदि कोविड अस्पताल में बेड मिल जाता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
कोविड एल-टू अस्पताल में वेंटिलेटर के चार सहित कुल 28 बेड हैं। इनमें पहले से मरीज भर्ती हैं। ऐसे में अन्य गंभीर मरीजों को भर्ती कर पाना संभव नहीं है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है।-डॉ मनोज निगम, प्रभारी सीएमएस जिला चिकित्सालय पुरुष
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अफसरों के पास नहीं बेड की उपलब्धता का लेखाजोखा
शासन ने कोरोना संक्रमितों का इलाज करने के लिए चिह्नित अस्पतालों में बेड खाली व भरे होने का लेखाजोखा हर समय अपडेट रखने के निर्देश हैं। इसके बावजूद अफसरों के पास जिले के अस्पतालों में कितने बेड खाली व भरे हैं। इसका कोई लेखाजोखा तक नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही कि बेड देने में मरीजों की मोटी जेब देखी जा रही है।
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