प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की लापरवाही से वार्षिक परीक्षा मजाक बनकर रह गई हैं। खुलेआम किताब रखकर तो कहीं पर छात्र-छात्राएं एक दूसरे की कापियों में नकल करके उत्तर लिख रहे हैं। वहीं मौजूद शिक्षक महज मूकदर्शक बने बच्चों की नींव ही खोखली करने में लगे रहे।
बांदा शहर में ही पोड़ाबाग स्थित प्राथमिक विद्यालय और स्वराज कालोनी स्थित प्राथमिक विद्यालय में परीक्षा के आखिरी दिन गुरुवार को बच्चे झुंड में परीक्षा देते रहे। इस दौरान बेखौफ शिक्षक नकल रोकने के बजाए आराम फरमाते रहे। उधर, बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों का दावा है कि नकल विहीन परीक्षा कराई जा रही हैं। नकल रोकने के लिए वाह्य कक्ष निरीक्षक भी लगाए गए। सचल दल को भी लगाया गया। लेकिन परीक्षा के आखिरी दिन संस्कृत, कृषि व गृह शिल्प में जूनियर के बच्चे किताबों से देखकर उत्तर लिखते रहे। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुलिस लाइन में नकल रोकने का कोई इंतजाम नहीं रहा।
सटकर बैठे बच्चे एक दूसरे की कापियों में ताकझांक करते रहे। ऐसा ही हाल जिले के तमाम विद्यालयों में देखने को मिला। उधर, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरौली में प्रधानाध्यापक गीता वर्मा ने गंभीरता से परीक्षा कराईं। खुद व शिक्षकों की निगरानी कक्षा छह से आठवीं तक के करीब 70 बच्चों ने परीक्षा दी। उधर, कई स्कूलों में शिक्षकों ने संस्कृत व कृषि में बच्चों को बोलकर उत्तर लिखाए। नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आखिर बच्चों को फेल भी तो नहीं करना। कम से कम लिख देंगे तो नंबर तो दे सकेंगे।