चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह में एक बार फिर बेटियों का दबदबा रहा। स्वर्ण मेडल पाने वालों में 31 में से 15 पर बेटियों का कब्जा रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईसीएआर के महानिदेशक एवं केंद्रीय कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. एस. अय्यप्पन को कुलाधिपति एवं प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने डाक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि प्रदान की।
बीएससी ऑनर्स की टॉपर अमृता डोकानिया को कुलाधिपति स्वर्ण समेत चार पदक मिले, वहीं नौ अन्य स्टूडेंट्स को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का गुरुमंत्र दिया तो मुख्य अतिथि डॉ. एस. अय्यप्पन ने विद्यार्थियों से अपील की कि वो आगे जाकर कृषि में रिसर्च करें ताकि फूड सिक्योरिटी का लक्ष्य हासिल किया जा सके। समारोह में कुल 512 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई।
प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक हेलीकाप्टर से दोपहर करीब 11 बजे सीएसए विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां गार्ड ऑफ ऑनर के बाद राज्यपाल ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति पर पुष्पचक्र अर्पित किया।
इसके बाद सुभाष चंद्र बोस छात्रावास, मृदा एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का लोकार्पण किया। इसके बाद कैलाश भवन में कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह ने सीएसए की प्रगति प्रतिवेदन पढ़ा। आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एस. अय्यप्पन ने सीएसए और कृषि में परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि कृषि में भी पीपीपी मॉडल की जरूरत है।
लेकिन, यह पीपीपी प्रेजेंट, प्रॉफिट और प्रेस्टिज है। हमें दूध, दलहन, तिलहन, मछली, अंडे सभी में क्रांति लाना है। चुनौती के रूप में पानी, ऊर्जा, बीज और कीट हैं। मुख्य अतिथि ने बेटे-बेटी को एग्रीकल्चर में भेजने पर जोर दिया। इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत अन्य विधाओं से तुलना की।
मंच पर इसके बाद पांच पुस्तकों को विमोचन हुआ। इसमें एटलस, फसल सुरक्षा में जैविक प्रबंधन और ग्रीष्मकालीन मूंगफली की सफली खेती नाम की पुस्तक रही। लैपटॉप के जरिये मंच से ही रजिस्ट्रार आफिस का आटोमेशन साफ्टवेयर लांच किया गया।
अंत में राज्यपाल ने संबोधन में डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों को सफलता के चार मंत्र बताए। उन्होंने कहा कि पहला स्माइल यानी मुस्कुराना, दूसरा एप्रीसिएट यानी किसी ने यदि अच्छा किया तो उसे अच्छा कहना सीखो, तीसरा डोंट डिफेमेशन अदर्स यानी किसी की कभी अवमानना न करो और चौथा ऐज डू बेटर यानी जो भी काम करते हैं और अधिक अच्छा कैसे होगा इस पर विचार करते जाओ।
यह चार मंत्र अपनाने वाला कभी भी सामाजिक जीवन में विफल नहीं हो सकता। उन्होंने कृषि को देश के आर्थिक विकास के लिए रीढ़ की हड्डी बताया। अपील की छात्र कृषि पर ज्यादा से ज्यादा शोध करें।