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Kanpur News: दूषित पानी और धूम्रपान से छह गुना बढ़ जाता मधुमेह का खतरा, शोध में हुआ खुलासा

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कानपुर। देश में स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बन चुका मधुमेह गलत खानपान या मोटापे की वजह से नहीं बल्कि दूषित पानी और धूम्रपान की वजह से बढ़ रहा है। इन दोनों वजह से मधुमेह का खतरा छह गुना तक बढ़ जाता है।
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इसकी पुष्टि डॉ. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दिव्यांगजन के बायोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. मनीष सिंह राजपूत और राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डाॅ. मनीष राज कुलश्रेष्ठ के शोध से हुई है।

उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘बायोलॉजिकल ट्रेस एलिमेंट्स रिसर्च’ ने मार्च 2025 के अंक में प्रकाशित किया है। उनके साथ अध्ययन में शोध छात्रा शेफाली सिंह, डाॅ. जूही वर्मा, डाॅ. निखिल गुप्ता, डाॅ. अनुपम कुमार पाठक, डाॅ. वंदना तिवारी शामिल रहे।
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डाॅ. मनीष राजपूत ने बताया कि देश भर में मधुमेह का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। कीटनाशक के बेतहाशा इस्तेमाल से भूजल भी दूषित हो गया है। पानी में आर्सेनिक और निकिल की अधिकता के कारण मधुमेह तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।

डॉ. राजपूत ने बताया कि इसे देखते हुए राम मनोहर लोहिया संस्थान में इलाज कराने पहुंचे मरीजों पर शोध किया गया। इसमें लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया, आजमगढ़, बहराइच, अयोध्या, सीतापुर, कुशीनगर और गोरखपुर के 783 मरीज शामिल रहे, जिसमें 480 मधुमेह रोगी थे।

सभी के खून की जांच हुई तो रिपोर्ट में आर्सेनिक (72.2 प्रतिशत) और निकिल (66.2 प्रतिशत) पाया गया। इन विषाक्त धातुओं के स्तर और डायबिटीज के मार्कर (जैसे-एचबीए1सी, इंसुलिन प्रतिरोध), बीटा सेल फंक्शन के बीच संबंध का भी आंकलन किया गया।

तब पाया कि दूषित धातुएं शरीर में इंसुलिन उत्पादन की क्षमता को कम कर रही थीं, जो डायबिटीज के लिए सीधे जिम्मेदार भी थीं। निकिल और आर्सेनिक का बड़ा कारण धूम्रपान भी निकला। धूम्रपान करने वाले रोगियों में निकिल 82 प्रतिशत और आर्सेनिक 80 प्रतिशत मिली। ऐसे सभी रोगी मधुमेह पीड़ित पाए गए।
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