पुलिस और इंटेलिजेन्स पूरी तरह से फेल साबित
यूपी के कानपुर में त्योहारों पर शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की डीएम, एसएसपी की रणनीति बेअसर रही। शहर में दो स्थानों पर सांप्रदायिक संघर्ष हो गया। खुफिया भी पूरी तरह फेल साबित हुई। नए रूट से ताजिया जुलूस क्यों निकालने की कोशिश की गई, ऐसी आशंका हर साल होती है तो इससे निपटने के लिए इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
मकानों की छतों से भारी पथराव किया गया इसलिए तय है कि छतों पर पत्थर इकट्ठा करके रखे गए थे। जूही परमपुरवा में तो सड़कें ईंट-पत्थरों से पटी पड़ी थीं, इतने ईंट-पत्थर एकाएक कहां से आ गए। माना जा रहा है कि साजिश पहले से रच जाती रही लेकिन खुफिया को इसकी भनक तक नहीं लगी। कानपुर रावतपुर रामलला इंटर कॉलेज परिसर में रामलीला कलाकारों पर भी पुलिस ने लाठियां भांजीं। यह सभी कलाकार एक कमरे में आराम कर रहे थे। देर शाम आयोजकों ने कलाकारों की पिटाई के विरोध में भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया।
रविवार दोपहर पथराव के बाद लाठीचार्ज का आदेश मिलते ही पुलिसकर्मियों ने लाठियां भांजना शुरू कर दिया। बाहर हो रहे हो-हल्ला को नजरअंदाज कर रामलीला कलाकार कॉलेज परिसर में बने एक कमरे में आराम कर रहे थे। अचानक पुलिस इस कमरे में दाखिल हुई तो कोई भी कुछ नहीं समझ पाया। कमरे में लेटे यह कलाकार कुछ समझ पाते उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटना चालू कर दिया। अभिनय करने वाले टेनी मस्ताना और मंडलाधीश राजू को कई लाठियां लगीं। राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान का अभिनय करने वाले कलाकारों को भी लाठियां लगीं। इसके बाद यह कलाकार मौका देखकर इधर-उधर भागे। कलाकारों का कहना है कि वह पुलिस को बताते रहे कि वह तो रामलीला में अभिनय करते हैं, उनका इस बवाल से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। उधर, श्री रामलला दशहरा कमेटी रावतपुर गांव के संयोजक चंद्र कुमार गंगवानी ने बताया कि रविवार को होने वाले भरत मिलाप का मंचन रद्द कर दिया गया।