ठंड के साथ अंडे के रेट भी आसमान छूने लगे हैं। बांदा जिले में हैदराबाद व पंजाब से देशी व फार्म वाले अंडे की आवक है। थोक से लेकर फुटकर तक मुनाफे के लिए अधिक दाम वसूला जाता है। इस पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।
दुकानदारों को सप्लाई कैरेट के हिसाब से देते हैं
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जिले में हर दिन करीब सवा लाख अंडे की खपत है। दिसंबर, जनवरी व फरवरी माह में खपत और बढ़ जाती है। जिले में अंडे के थोक दुकानदार भी हैं। जो फुटकर अंडा बेचने के लिए दुकानदारों को सप्लाई कैरेट के हिसाब से देते हैं। माह भर पहले उबला अंडा पांच रुपये में था। इस समय उबले अंडे की कीमत 7 से 8 रुपये हो गई है। जबकि थोक दुकानों में यह पांच रुपये में मिल रहा है।
रोडवेज बस स्टैंड में अंडा कारोबारी मोहम्मद नईम ने बताया कि मुर्गियों के चारे पर जीएसटी का चाबुक चला है। चारे के दाम में इजाफा के कारण अंडे का रेट भी अधिक लिया जा रहा है। उन लोगों को प्रति पेटी 10 रुपये का मुनाफा कंपनी की ओर से मिलता है। कानपुर व लखनऊ से अंडा मंगाना महंगा पड़ रहा है। इसलिए सीधे हैदराबाद या पंजाब से अंडे मंगाए जा रहे हैं। देशी अंडे की कीमत हमेशा फार्मी अंडे से अधिक होती है। देशी अंडे का रेट दोगुना है।
जांच करने वाला कोई नहीं है
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उधर, थोक दुकानों से अंडा खरीदने के बाद दुकानदार ग्राहकों से कितना रुपये वसूल रहे हैं। इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कभी दुकानों को चेक तक नहीं करते।
देशी की मांग ज्यादा, आवक कम
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देशी अंडा ग्रामीण इलाकों में मिलता जरूर है, पर इतनी संख्या नहीं होती कि ग्राहकों की मांग पूरी हो सके। जिले में औसतन 8 हजार अंडे देशी बिकते हैं। गांवों में 8 से लेकर 10 रुपये में देशी अंडे बिक रहे हैं। यह शहर की दुकानों पर पहुंचकर 12 से 15 रुपये तक पहुंच जाते हैं। देशी अंडे मंहगे होने के कारण फार्मी अंडों की खपत अधिक होती है।