आईआईटी कानपुर में दलित उत्पीड़न मामले में चार प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर के बाद छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया साइट्स पर अपनी-अपनी बातें लिख रहे हैं। संस्थान में कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बन गए हैं। एक में आरक्षण समर्थक और दूसरे में आरक्षण विरोधी लिख रहे हैं। सभी डॉ. सडरेला मामले में भी अपनी-अपनी बातें रख रहे हैं। यहां तक कि अब कक्षाओं में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव न बढ़े, इसके लिए इंस्टीट्यूट प्रशासन ने आईआईटी कानपुर का कन्फेशन पेज और स्टूडेंट मीडिया पेज वॉक्स पॉपुली पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है। कन्फेशन पेज पर छात्र-छात्राएं बगैर अपने नाम का खुलासा किए अपनी बातें लिख सकते थे। इस पेज पर आरक्षण के विरोध और पक्ष में काफी बड़ी बहस शुरू हो गई थी। इसको देखते हुए तत्काल प्रभाव से इंस्टीट्यूट प्रशासन ने इसपर रोक लगा दी है।