कानपुर। यदुपति ट्रेड बिज के साथ हुई 69 लाख रुपये की ठगी में कंपनी के जानकारों पर शक की सुई घूम रही है। कमिश्नरी पुलिस की साइबर क्राइम टीम को जिस वॉट्सएप नंबर से मैसेज भेजे गए थे उसके कई आईपी एड्रेस मिले हैं। इन आईपी एड्रेस की जांच शुरू हो गई है। पुलिस ने मोबाइल नंबर की डिटेल भी हासिल कर ली है जबकि बैंक खातों को तलाशा जा रहा है।
रियल स्टेट और ट्रेडिंग कंपनी यदुपति ट्रेड बिज के साथ 1.97 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। आरोपी ने कंपनी के एमडी राघवपति सिंहानिया के नाम से वॉटसअप अकाउंट बनाकर निदेशक अनिल कुमार अग्रवाल को मैसेज किया। उसने निदेशक को नंबर सेव करने के लिया कहा। निदेशक ने सोचा शायद यह एमडी का नया नंबर होगा। उन्होंने नंबर सेव कर दिया। अगले दिन उनके पास मैसेज आया कि एक कंपनी से डील के लिए 1.97 करोड़ रुपये की जरूरत है। मैसेज में अकाउंट नंबर दिया है, उसमें रुपये ट्रांसफर कर दें। निदेशक ने रुपये ट्रांसफर कर दिए। दोनों ही दिल्ली के कार्यालय में थे। एमडी से मुलाकात होते ही निदेशक ने उनसे रुपयों के बारे में पूछा तो उन्होंने इन्कार कर दिया। आनन फानन निदेशक ने 1.28 करोड़ रुपये होल्ड कराए। क्राइम ब्रांच ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। सबसे पहले मोबाइल नंबर और वॉट्सएप अकाउंट नंबर की जांच हुई। वॉट्सएप सर्वर आधारित सेवा रहती है, जिससे उसके कई आईपी एड्रेस मिले हैं। पुलिसकर्मियों ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल नंबर कोलकाता की एक दवा कंपनी के नाम से रजिस्टर्ड बता रहा है। कंपनी से बातचीत की जा रही है। यह मोबाइल नंबर संभव है किसी ने कंपनी के अधिकारी के दस्तावेज लगाकर हासिल किए हों। इसकी जांच चल रही है। निदेशक के पास जिस तरह से मैसेज भेजे गए हैं। उस तरह के मैसेज एमडी करते हैं। ऐसे में ट्रेडिंग कंपनी के जानकार पर शक की सुई है।