कानपुर। कोरोना काल में दवाओं के छिड़काव से दबा सामान्य मलेरिया अब खूनी मलेरिया के लक्षण के साथ उभर रहा है। सामान्य मलेरिया प्लास्मोडियम विवैक्स को कहते हैं। इसमें अब खूनी मलेरिया प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के लक्षण मिल रहे हैं। यह अधिक घातक होता है। इसे लेकर शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित यूपी एपीकॉन-2025 में डॉक्टरों को आगाह किया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकारों को एसोसिएशन फिजिशियन ऑफ इंडिया ने अभियान शुरू करने की सलाह दी है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के प्रदेश चैप्टर के बैनर तले आयोजित कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ज्योतिर्मय पाल ने कहा कि ऐसे रोगों के शोध पर डॉक्टर अधिक ध्यान दें। ये दोनों तरह के मलेरिया मच्छर काटने से फैलते हैं। यह भी सलाह दी गई कि सीटी, एमआरआई आदि जांचों के भरोसे इलाज न करें। रोगी की हिस्ट्री और क्लीनिकल लक्षणों पर फोकस करें।
कॉन्फ्रेंस का विषय रिडिफाइनिंग मेडिसिन-बेंच टू बेड एंड बिहाइंड रखा गया। डॉ. पाल ने बताया कि सामान्य विवैक्स मलेरिया का उपचार अधिक सतर्कता के साथ करें। रूटीन उपचार से रोगी को नुकसान हो सकता है। संक्रामक रोग सत्र में गुवाहाटी के डॉ. शेखर चक्रवर्ती ने मलेरिया के नए रूप के संबंध में जानकारी दी। कहा कि सामान्य मलेरिया का उपचार करते वक्त खूनी के लक्षणों को भी देखें। यह अंदेशा जाहिर किया गया कि सामान्य मलेरिया के रोगाणु ने अपने में परिवर्तन किया है।
यूए एपीआई के चेयरमैन डॉ. संजय टंडन ने रोगियों की हिस्ट्री और लक्षणों पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी। विशेष लक्षण मिलने पर ही रोगियों की डायग्नोस्टिक जांचें कराएं। इस मौके पर मेडिसिन अपडेट स्मारिका का विमोचन किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. पाल रहे। कार्यक्रम के संरक्षक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.संजय काला, आयोजन अध्यक्ष उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि, सचिव डॉ. एसके गौतम, डॉ. बीपी प्रियदर्शी, डॉ. विशाल कुमार गुप्ता, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. एमपी सिंह आदि मौजूद रहे।
अभियान के लिए एपीआई की सिफारिशें
नमक का सेवन कम करें, दो से चार मिग्रा दिन में नमक खाएं, अभी लोग 10 से 12 मिग्रा नमक खा रहे।
स्वास्थ्य संबंधी दिवसों का आयोजन कर लोगों को जागरूक करें
बीपी, डायबिटीज, हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक आदि रोगों से बचा जा सकता है, तरीके बताएं
विशेषज्ञ शोध कार्यों पर फोकस करें, देश में कम शोध हो रहे, सरकार फंडिंग करे